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तो क्या इन एयरबेस का प्रयोग किया भारतीय वायुसेना ने, पाक को नहीं लगी भनक!

Tue, 26 Feb 2019 11:34 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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मिराज 2000 विमान
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पुलवामा हमले के 12 दिन बाद भारतीय वायुसेना ने पीओके में घुसकर वीर जवानों की शहादत का बदला ले लिया है। वायुसेना ने मंगलवार तड़के 'एयर स्ट्राइक' कर आतंकियों के ठिकानों को नेस्तनाबूत कर दिया। माना जा रहा है कि इस ऑपरेशन में वायुसेना के मिराज 2000 विमानों ने आगरा और बरेली स्थित एयरबेस से उड़ान भरी। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।

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14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा हुए आतंकी हमले के बाद सरकार और सेना ने आतंकियों को कड़ा जवाब देने की ठान ली थी। भारत का कड़ा रुख देखते हुए पाकिस्तान भी सर्तक था। पाक की नजर जम्मू-कश्मीर और पंजाब के एयरबेस पर थी। माना जा रहा है कि वायुसेना ने इसीलिए अंदरुनी इलाकों के एयरबेस का इस्तेमाल किया।

सोमवार की देर रात आगरा में मिराज 2000 लड़ाकू विमान गरजे तो लोगों की नींद टूट गई। मंगलवार सुबह जब टीवी खोला तो आतंकी ठिकानों पर भारत द्वारा हवाई हमले की खबर से लोगों का दिल खुश हो गया। माना जा रहा है कि इस एयर स्ट्राइक को अंजाम देने के लिए वायुसेना के विमानों ने आगरा एयरबेस और बरेली एयरबेस से उड़ान भरी थी। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

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'1000 किलो बम गिराए गए'

मिराज विमान
समाचार एजेंसी एएनआई ने भारतीय वायुसेना के सूत्रों के हवाले से कहा कि 26 फरवरी की तड़के भारतीय लड़ाकू विमान मिराज 2000 के एक समूह ने एलओसी पारकर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी कैंप पर बमबारी की और उसे पूरी तरह से नष्ट कर दिया। आतंकी कैंप पर 1000 किलो बम गिराए गए। 

इस अभियान में 12 मिराज विमानों ने हिस्सा लिया। बालाकोट, चकोठी और मुजफ्फराबाद के एलओसी स्थित आतंकी कैंप लांच पैड्स को वायुसेना हवाई हमलों में पूरी तरह से नष्ट कर दिया। जैश-ए-मोहम्मद के नियंत्रण कक्ष को पूरी तरह से तबाह कर दिया गया। 

वायुसेना ने इस अभियान के लिए लेजर गाइडेड बम का इस्तेमाल किया। जिन एयरबोर्न अर्ली वार्निंग विमानो का इस्तेमाल इस अभियान में किया गया उन्हें हमने इजरायल से खरीदा है। पिछले तीन दिनों से हिंडन एयरबेस पर इस तरह के विमानों को अलर्ट पर रखा गया है।

आतंकियों पर वायुसेना की बड़ी कार्रवाई के बाद देशभर में जोश की लहर दौड़ गई है। लोग सेना के जांबाजों सलाम कर रहे हैं। जगह जगह जश्न मनाया जा रहा है। आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद समेत कई जिलों में वायुसेना की इस बड़ी कामयाबी पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 
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तो इस कारण भारत ने खरीदा था फ्रांसीसी विमान 'मिराज 2000'

मिराज विमान
पाकिस्तान को अमेरिका द्वारा उस समय के सबसे बेहतरीन विमान एफ-16 को दिए जाने के बाद भारत ने फ्रांस के मिराज 2000 की खरीद के संबंध में बातचीत शुरू कर दी थी। अक्टूबर 1982 में भारत ने 36 सिंगल-सीट मिराज-2000Hs और 4 ट्विन-सीट मिराज-2000THs के लिए डसॉल्ट को ऑर्डर दिया।

पहले, 150 विमानों की खरीद के लिए फ्रांस के साथ बातचीत चल रही थी, जिसका निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ संयुक्त उत्पादन के तहत होता।  भारत के पास लाइसेंस के तहत कई मिराज 2000 का उत्पादन करने का विकल्प था जो बाद में सोवियत संघ के साथ देश के घनिष्ठ संबंध के कारण खत्म हो गया था।

29 जून 1985 को नंबर 7 स्क्वाड्रन के पहले सात विमानों की डिलीवरी के साथ भारतीय वायु सेना इस प्रकार का पहला विदेशी सेना बनी जिसके पास मिराज 2000 विमान थे। शुरूआत में इस विमान में स्नेक्मा एम 53-5 इंजन थे जिसे बाद में एम 53 पी-2 इंजन से बदल दिया गया।

मिराज 2000 में परिवर्तित होने वाला दूसरा स्क्वाड्रन नंबर 1 स्क्वाड्रन था। जिसे द टाइगर्स के नाम से जाना जाता है। इसे 1986 में औपचारिक रूप से भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया
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