ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ चले स्वतंत्रता आंदोलन में पीली कोठी की भूमिका लोगों को अब तक याद है। वजीरपुरा की ऐतिहासिक पीली कोठी की हर ईंट में देश के स्वतंत्रता आंदोलन की कहानियां छिपी हुई हैं।
आजाद भारत के लिए ब्रिटिश हुकूमत को बम के धमाकों से हिलाने के लिए क्रांतिकारियों ने वजीरपुरा की ऐतिहासिक पीली कोठी को अपनी शरण स्थली बनाया। राजा लक्ष्मण सिंह के पाैत्र कुंवर प्रबल प्रताप सिंह की पीली कोठी आजादी के मतवालों के लिए सुरक्षा घेरा था। उस समय राजा का ऐसा रसूख था कि ब्रिटिश पुलिस कभी प्रवेश ही नहीं कर सकी। क्रांतिकारियों को इसका लाभ मिला और यहीं से आगे की रणनीति भी तैयार होने लगी। आयकर भवन बम कांड की घटना ने ब्रिटिश शासन को हिलाकर रख दिया था।
विज्ञापन
कुंवर दिनेश प्रताप सिंह ने बताया कि उनके दादा और पिता की शख्सियत के कारण अंग्रेजों ने कोठी में कभी प्रवेश नहीं किया। पीली कोठी आजादी के आंदोलन की कई यादें समेटे हुए हैं। दिनेश प्रताप सिंह ने बताया कि यहीं पर क्रांतिकारियों के छिपने और हमले की रणनीति यहीं से बनाई जाती थी। उनके दादा क्रांतिकारियों को सुरक्षा और उनके परिवारों की रहने खाने की व्यवस्था करते थे। क्रांतिकारियों ने पीली कोठी में रहकर ही आयकर भवन बम कांड की रणनीति तैयार की थी। यह घटना 1940 की है, जिसे हार्डी बम कांड के नाम से जाना जाता है।
लोहे की चिमनी में छिपा दी थी रिवाॅल्वर
कुंवर दिनेश प्रताप सिंह बताते हैं कि कई बार ऐसी घटनाएं हुईं, जो आज भी याद हैं। रिवाॅल्वर की एक घटना का जिक्र करते हुए बोले की सन तो याद नहीं हैं, लेकिन सर्दियों का समय था और कुछ क्रांतिकारी कोठी पर आ गए। उनके पास एक रिवाॅल्वर था। इसी समय सूचना मिली कि पुलिस को जानकारी हो गई है और वह कोठी तक पहुंच चुकी है। अचानक रिवाॅल्वर छिपाने के लिए अलाव के लिए इस्तेमाल होने वाली चिमनी वहीं थी। इसपर उसी चिमनी की राख में रिवाॅल्वर को छिपाया गया। हालांकि बाद में पता चला कि गलत सूचना दी गई थी।
मुस्लिम कोतवाल ने बचाई थी कोठी
आजादी के आंदोलन पर चर्चा करते हुए कुंवर दिनेश प्रताप सिंह ने बताया कि क्रांतिकारी दल में शामिल होने वालों को बम फेंकने के लिए प्रशिक्षित किया जाता था। ईंट और पत्थर फिंकवाकर बम फेंकना सिखाया जाता था। एक दिन क्रांतिकारियों के दल में एक नया व्यक्ति शामिल हुआ। काठी में उस समय क्रांतिकारियों ने हरीपर्वत थाने के पास बम कांड की योजना बनाई थी। इस पर उसने बम कांड करने में उत्सुकता दिखाई।
क्रांतिकारियों ने मना किया, लेकिन दादा जी के कहने पर सब मान गए। अभ्यस्त न होने के कारण बम उससे छूट गया और पूरी ताकत से न फेंकने के कारण बड़ा धमाका नहीं हुआ, लेकिन पुलिस को पता चल गया और उसे पकड़ लिया। उस समय हरीपर्वत थाने में एक मुस्लिम कोतवाल हुआ करते थे। पूछताछ में उसने बता दिया कि वह पीली कोठी से बम लेकर आया था और क्रांतिकारियों ने वहीं बम कांड की योजना बनाई थी। इस पर कोतवाल ने दादा को बुलाया और कहा कि सावधान रहिए, अगर मेरी जगह कोई अंग्रेज पुलिस अफसर होता तो आज कोठी में पुलिस घुसना तय था।