आतंकी धमकियों से बढ़ती गई ताज की सुरक्षा
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32 साल पहले खालिस्तानी आतंकवादियों ने धमकी दी और ताज महल रात में पर्यटकों के लिए बंद हो गया। अल कायदा का खतरा बढ़ा तो ताज पर सीआईएसएफ तैनात हो गई। अब फिर सुरक्षा पर खतरा मंडराया तो दक्षिणी गेट बंद करने का सुझाव खुफिया एजेंसियों ने सरकारी फाइलाें में चला दिया है।
ताजमहल पर सबसे पहले आतंकी खतरे का साया 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उठा था। तब ताज में रात में प्रवेश बंद किया गया और पर्यटकों के लिए सूर्योदय से सूर्यास्त तक का वक्त तय हुआ। शरद पूर्णिमा पर प्रसिद्ध ‘चमकी मेला’ खालिस्तानी आतंकियों की धमकी के कारण बंद किया गया। उसके बाद से ही लगातार ताज की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया जाता रहा। 2001 में सीआईएसएफ ने ताज की सुरक्षा का जिम्मा संभाला और पहली बार ताज के लिए यलो जोन और रेड जोन की सुरक्षा का प्लान तैयार हुआ। पुलिस में ताज सुरक्षा के लिए अलग से अधिकारी नियुक्त हुए और यलो जोन में बैरियर, डीएफएमडी, सीसीटीवी कैमरे, मोर्चे आदि बनाए गए। रेड जोन में करीब 250 और यलो जोन में 550 पुलिस और पीएसी के जवान ताज की सुरक्षा में तैनात हैं। हाल में ही आतंकी खतरे के इनपुट पर रात में तीनों गेटों को सील करना शुरू किया गया है, वहीं दक्षिणी गेट की छोटी खिड़की भी बंद कर दी गई।
शराबी तोड़ चुके ताज का सुरक्षा चक्र
दिल्ली से आगरा में शादी में शरीक होने आए तीन युवक बीते सप्ताह ही ताज का सुरक्षा चक्र तोड़ चुके हैं। यलो जोन यानी पुलिस की निगरानी वाले ताज के बाहरी क्षेत्र में तीनों युवक ताज की दीवार पर रात में फलांग कर चढ़ गए। सीआईएसएफ जवान की चौकसी से तीनों युवक धर लिए गए, लेकिन उन्होेंने तब तक ताज के सुरक्षा घेरे को तोड़ दिया था। पुलिस ने तीनों पर मुकदमा तो दायर किया, लेकिन अपने कर्मचारियों की लापरवाही पर कोई कार्रवाई अब तक नहीं की। सीओ ताज सुरक्षा अवनीश कुमार के मुताबिक जांच चल रही है। एक पुलिसकर्मी के बयान लिए जाने हैं।