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UP: विकास कार्यों का हाल...हवा में लटके पुल, 71 करोड़ बढ़ गई लागत, 15 साल से पड़े अधूरे

Mon, 21 Jul 2025 09:22 AM IST
धीरेन्द्र सिंह देश दीपक तिवारी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा में नदियों और रेलवे लाइनों के ऊपर बनने वाले पुलों की चाल देखिए। आधा दर्जन से अधिक पुल धरातल पर नहीं उतर पा रहे। हवा में लटके-लटके ही इनकी लागत 71 करोड़ रुपये बढ़ गई है।
 
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अधूरा पुल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नदियों और रेल लाइनों के ऊपर बन रहे कई पुल धरातल पर नहीं उतर पा रहे हैं। निर्माण शुरू होने के बाद से हवा में लटके-लटके ही चार पुलों की लागत 71 करोड़ रुपये बढ़ गई।
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रावली मंदिर पर रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) का निर्माण 15 साल से अधूरा पड़ा है। वहीं दक्षिणी बाईपास पर रुनकता से रोहता मार्ग को जोड़ने वाला आरओबी सात साल से अधर में है। यमुना नदी पर मेहरा नहारगंज में अनवारे पुल का निर्माण भी 15 साल से लटका है। यह पुल बन जाने पर आगरा और फिरोजाबाद का आवागमन और आसान हो जाता। करीब 50 गांव के लोगों को पुल निर्माण नहीं होने से 25 किमी. चक्कर लगाना पड़ता है।

 

आनंदी भैरों से डेरा बंजारा तक यमुना नदी पर 2023 में स्वीकृत हुए पुल के निर्माण के लिए अभी तक एक भी ईंट नहीं रखी जा सकी। उधर, रेणुका धाम के पास यमुना नदी पर रुनकता को बल्देव मार्ग से जोड़ने वाले पुल के सिर्फ पिलर खड़े हो सके। यह पुल भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। लेटलतीफी के कारण इस पुल की लागत 24.03 करोड़ रुपये बढ़ गई।

 

दक्षिणी बाईपास पर आरओबी की लागत में 17.92 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ, जबकि रुनकता से रोहता मार्ग को जोड़ने वाले आरओबी निर्माण की लागत 20 करोड़ रुपये बढ़ चुकी है। रावली मंदिर आरओबी की लागत 9.13 करोड़ रुपये बढ़ चुकी है। देरी के कारण चार पुलों की लागत 71 करोड़ बढ़ चुकी है।

 

दो लाख से अधिक लोगों को होता फायदा
यमुना नदी और रेल लाइनों पर प्रस्तावित पुलों का निर्माण नहीं होने से करीब 100 गांव प्रभावित हैं। पुल बन जाने पर करीब दो लाख लोगों को फायदा होता। उन्हें लंबी दूरी और चक्कर नहीं काटने पड़ते। आरओबी निर्माण से राहगीरों के समय की बचत होती। जन प्रहरी संस्था संयोजक नरोत्तम सिंह का कहना है कि पुलों के निर्माण की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।



 

इन पुलों का निर्माण लटका
- यमुना नदी पर आनंदी भैरों से डेरा बंजारा गिजौली मार्ग पर 111 करोड़ रुपये से पुल का निर्माण 16 नवंबर 2023 को स्वीकृत हुआ। 31 दिसंबर 2026 तक निर्माण पूर्ण होना है। अभी तक काम शुरू नहीं हुआ।
- यमुना नदी पर रेणुका धाम के पास रुनकता से बल्देव मार्ग को जोड़ने के लिए 35.58 करोड़ रुपये से पुल निर्माण अक्तूबर 2020 में स्वीकृत हुआ। 30 जून 2025 तक काम पूरा होना था। सिर्फ पिलर खड़े हुए। लागत 24.03 करोड़ बढ़कर अब 59.41 करोड़ हो गई है।
- एनएच-2 को एनएच-3 से जोड़ने के लिए रुनकता से रोहता मार्ग दक्षिणी बाईपास रेल फाटक 11सी-2टी का निर्माण 1 फरवरी 2019 को 60.09 करोड़ से स्वीकृत हुआ। 28 फरवरी 2025 तक काम पूरा होना था। लागत बढ़कर 78.01 करोड़ रुपये हो चुकी है।
- एमजी रोड पर रावली मंदिर के पास आरओबी निर्माण 1 जून 2010 को 10.82 करोड़ से स्वीकृत हुआ। लागत बढ़कर अब 19.95 करोड़ पहुंच गई। 50 फीसदी पुल का निर्माण का पीडब्ल्यूडी ने दावा किया है। 31 दिसंबर 2025 तक पुल निर्माण पूरा होना है।
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शासन को भेजा है पत्र
जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने बताया कि पुलों के निर्माण की समीक्षा की गई है। बजट व अन्य बिंदुओं पर शासन को पत्र भेजा है। संबंधित विभागों से भी जवाब मांगा जाएगा। 
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