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जूता कारोबारियों पर आयकर का छापा: लॉकरों से मिले कागजात, शहर के चारों कोनों पर खरीदीं संपत्तियां

Fri, 07 Jan 2022 09:15 AM IST
Abhishek Saxena अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

आयकर विभाग ने नोवा शूज, तारा इनोवेशंस, आहूजा इंटरनेशनल, ओम एक्सपोर्ट पर छापे में कई कागजात जब्त किए है, जिनसे किराये की रकम मिलने और संपत्ति की खरीद के कागजात मिले हैं। 
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मानसी चंद्रा की फैक्टरी में आयकर अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग के मंगलवार सुबह से चल रहे छापे गुरुवार देर रात और शुक्रवार सुबह तक जारी रहे। गुरुवार को आयकर विभाग की टीमों ने चारों जूता कारोबारियों के घर पर लॉकरों की छानबीन की। जिसमें बड़ी मात्रा में जमीन खरीद से जुड़े संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। शहर के चारों कोनों पर उन्होंने संपत्तियों की खरीद-फरोख्त की है। खासकर फतेहाबाद रोड, आगरा मथुरा रोड और इनर रिंग रोड के पास बड़े पैमाने पर जमीन में निवेश किया गया है। 
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चारों फुटवियर कारोबारियों के आय के स्रोत खंगाल रही टीमें
गुरुवार को आयकर विभाग के अधिकारियों की जांच टीमें चारों फुटवियर कारोबारियों के निवेश और आय के स्रोत खंगालने में लगी रहीं। आयकर अधिकारियों के मुताबिक मनु अलघ के पास संपत्ति में निवेश के कई कागजात मिले हैं, जिस रकम से मनु अलघ ने यह संपत्तियां खरीदी हैं। उसे लेकर आयकर विभाग के अधिकारियों ने पूछताछ की और उससे जुड़े सबूत मांगे। संपत्ति खरीदने के साथ ही इन को लीज पर दिए जाने और किराए की रकम पर भी जांच की जा रही है। आयकर टीमों ने मनु अलघ, मानसी चंद्रा, राजेश सहगल और विजय आहूजा की फुटवियर इकाइयों में होने वाले उत्पादन का पूरा रिकॉर्ड निकलवाया है। स्टॉक रजिस्टर से कच्चा माल तैयार माल आदि के मिलान की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। इसके आधार पर वास्तविक मुनाफे का आकलन किया जा रहा है।
टीमें कर रहीं जांच
अपर निदेशक आयकर जांच नीलम अग्रवाल के निर्देशन में चल रही इस कार्रवाई का नेतृत्व सहायक निदेशक जांच आशिमा महाजन कर रही हैं। आयकर छापों के इन तीन दिनों में आयकर विभाग की टीम जिस लॉकर को खोल रही है, उसी लॉकर में संपत्तियों के कागजात निकल रहे हैं। फुटवियर कारोबारियों ने जो रिटर्न जमा की है, उसमें आय को काफी कम दिखाया गया है। इसके सापेक्ष निवेश बहुत ज्यादा है। टीम यह जानने का प्रयास कर रही है कि निवेश की इस रकम का असल में स्रोत क्या है। एक ही पते पर कई कंपनियों के मामले की जानकारी सेंट्रल जीएसटी के अधिकारियों को भी दे दी गई है।
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