नोटबंदी और जीएसटी पर सरकार और अर्थशास्त्रियों के बीच बहस बेशक हो, लेकिन आयकर विभाग को आगरा में 101 करोड़ रुपये की अघोषित आय सरेंडर होने की मुख्य वजह नोटबंदी और जीएसटी ही रही।
बीते साल नवंबर में नोटबंदी से लेकर जीएसटी लागू होने तक के लेनदेन और बोगस फर्म के जरिए भुगतान पर नजर रखने के कारण ही दोनों कारोबारी समूहों पर शिकंजा कस पाया। शहर में ऐसे 40 बड़े कारोबारी आयकर विभाग के रडार पर हैं, जिन पर ऐसे ही बड़े आयकर छापे और बड़ी आय के खुलासे हो सकते हैं।
नोटबंदी के दौरान सभी बैंक खातों में जमा किए गए 500 और 1000 रुपये के बंद नोटों का ब्यौरा बैंकों ने आयकर विभाग को भेजा था। जिन खातों में बड़ी रकम जमा की गई और आरटीजीएस के जरिये एक- दो नहीं, बल्कि पांच-छह कंपनियों को भेजी गई, उनकी जांच के बाद आयकर विभाग ने टैक्स रिटर्न देखा तो श्री बसंत ऑयल ग्रुप और बीएनआर का पूरा खेल समझ आ गया।
नोटबंदी के बाद पहला मामला
नोटबंदी के बाद यह पहला मामला रहा, जिसमें करोड़ों रुपये के पुराने नोटों को जमा करने का ब्यौरा छापे का आधार बना। एक जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद श्री बसंत ऑयल ग्रुप की कंपनियों के लेनदेन और बिलिंग में एकाएक कमी आई।
इसने आयकर अधिकारियों के छापे की वजह को और पुख्ता किया। नोटबंदी से लेकर अब तक आयकर अधिकारियों की टीम ने बोगस फर्म और फर्जी कंपनियों के पते तक जांच लिए। बीएनआर ग्रुप के रियल इस्टेट और खाद्य तेल कंपनियों की दो साल की रिपोर्ट में भारी अंतर देखने को मिला।
40 बड़े कारोबारी आयकर के रडार पर
श्री बसंत ऑयल और बीएनआर ग्रुप पर आयकर छापे में 101 करोड़ रुपये की अघोषित आय सरेंडर होने से विभाग का उत्साह बढ़ा है। इस साल छापे के दौरान जूता कारोबारी की ह्रदयाघात से मौत के बाद आयकर के छापे बंद कर दिए गए थे।
विभाग ने यह पहला छापा इस वित्तीय वर्ष में मारा था, जबकि उनके रडार पर 40 बड़े कारोबारी हैं। नोटबंदी के दौरान बैंकों में जमा की गई रकम से लेकर जीएसटी लागू होने के बाद तक के पूरा वित्तीय ब्यौरे को आयकर विभाग ने खंगाल लिया है। दिवाली से पहले ही इनमें से कुछ पर छापे डाले जा सकते हैं। खाद्य तेल से जुड़े तीन कारोबारियों के खातों पर भी विभाग की निगाह है।