उत्तर प्रदेश में खूनी सड़कों के मामले में आगरा तीसरे नंबर पर हैं। सबसे ज्यादा लखनऊ, फिर कानपुर, इसके बाद आगरा में सबसे ज्यादा हादसे हुए हैं। लोगों की जान गई और घायल भी हुए हैं। कभी सड़क निर्माण में खामी तो लापरवाही हादसों की वजह बन रही है।
भारत सरकार की सड़क परिवहन और हाईवे परिवहन मंत्रालय की रिसर्च विंग की ओर से 50 शहरों की सूची में आगरा का भी नाम है। जारी आंकड़ों में उत्तर प्रदेश के आगरा, गाजियाबाद, कानपुर, लखनऊ और मेरठ का नाम शामिल है।
इसके मुताबिक, साल 2015 में आगरा में 1143 सड़क दुर्घटनाएं र्हुईं। इनमें से 474 लोग मरे, जबकि 650 लोग घायल हुए। साल 2016 में यह आंकड़ा कुछ बढ़ गया। 1062 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 522 लोग मरे और 811 लोग घायल हो गए।
साल 2016 की यह है स्थिति
हादसे मरने वाले घायल
लखनऊ : 1639 631 990
कानपुर : 1451 684 911
आगरा : 1062 522 811
मेरठ : 977 421 748
गाजियाबाद : 881 421 647
साल 2015 की यह है स्थिति
हादसे मरने वाले घायल
कानपुर : 1496 665 1077
लखनऊ : 1371 526 820
आगरा : 1143 474 650
मेरठ : 962 396 721
गाजियाबाद : 826 331 668
ट्रिपल ‘ओ’ है हादसों की प्रमुख वजह
हादसा
- फोटो : अमर उजाला
ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक , ट्रिपल ओ हादसों की प्रमुख वजह है। नंबर एक ओवर स्पीड से हादसे होते हैं। हाईवे और एक्सप्रेस वे पर निर्धारित गति से अधिक पर वाहन चलाने पर हादसा होता है।
नंबर दो पर ओवर लोडिंग है। वाहनों में क्षमता से अधिक लोगों को ले जाना और क्षमता से अधिक माल लदा होना हादसों की वजह बनता है। इसके अलावा तीसरे नंबर ओवरटेकिंग भी है। हाईवे और एक्सप्रेसवे पर गलत तरीके से ओवरटेक करते समय वाहन हादसों का शिकार हो जाते हैं।
सड़क निर्माण में खामी भी
सड़क निर्माण में खामी की वजह से भी हादसे होते हैं। कहीं सड़क पर निर्धारित स्पीड के बोर्ड नहीं लगे होते तो टर्न पर संकेतकों का न लगा होना भी हादसों की वजह बनता है। कई बार वाहनों के सड़क पर पार्क करने की वजह से दूसरे वाहन उनसे भिड़ जाते हैं। शहरी क्षेत्र में लोगों के आने जाने के लिए अंडरपास नहीं होने की वजह से हाईवे पर होकर क्रास करते हैं। ऐसे में भी सड़क दुर्घटना हो जाती है।