अछनेरा। ब्लॉक अछनेरा के गांव नगला लालदास में व्यवस्था की संवेदनहीनता ने एक बुजुर्ग आंदोलनकारी की बलि ले ली। कुशवाह बस्ती के पास स्थित रायभा तालाब की गंदगी के खिलाफ पिछले 78 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे मिठ्ठनलाल की शुक्रवार सुबह इलाज के दौरान माैत हो गई। बुजुर्ग की मौत की खबर मिलते ही पूरे क्षेत्र में उबाल है।
ग्रामीण पिछले 31 जनवरी से तालाब की सफाई और जल निकासी के स्थायी समाधान की मांग को लेकर धरने पर डटे हुए थे। लगातार होती अनदेखी के कारण धरना लंबा खिंचता गया। इसी संघर्ष के बीच 10 अप्रैल को मिठ्ठनलाल की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। उन्हें आगरा के जीवन ज्योति अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 17 अप्रैल को सुबह 4 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया। चिकित्सकों के अनुसार, लंबे समय तक तनाव और प्रतिकूल परिस्थिति में रहने के कारण उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हुई थी। ग्रामीणों ने दो-टूक कह दिया है कि जब तक तालाब की गंदगी का स्थायी समाधान और मृतक के परिवार को न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका धरना और प्रदर्शन समाप्त नहीं होगा।
इंसेट
ग्रामीणों का प्रशासन पर अनदेखी का आरोप
ग्रामीणों और पूर्व प्रधान बनवारी लाल ने सीधे तौर पर तहसील प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों को इस मौत का जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है किदो महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी किसी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके पर आकर सुध नहीं ली। बार-बार शिकायत और प्रदर्शन के बावजूद तालाब की सफाई के लिए एक कदम नहीं उठाया गया। यदि प्रशासन समय रहते जाग जाता, तो मिठ्ठनलाल आज जीवित होते। मामले उपजिलाधिकारी से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
आला अधिकारियों के निर्देश पर गांव में तालाब सीमांकन करा दिया है। शनिवार को लेखपाल को मृतक मिठ्ठनलाल के घर भेजकर जांच कराई जाएगी। जांच के बाद विधिक कार्रवाई अमल में लायी जाएगी।
-दीपांकर सिंह तहसीलदार किरावली