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विडंबना- लाश करती रही अपनों के कांधों का इंतजार, तड़पता रहा बेबस लाड़ला

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कासगंज। कोरोना संक्रमण ने मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों को भी अपने खौफ की जद में ले लिया है। नतीजा यहां मौत के बाद शवों को अपनों के कांधे नसीब नहीं हो पा रहे। कोरोना अस्पताल में एक महिला की मौत के बाद जब घंटों कंधा देने कोई नहीं पहुंचा तो निजी एंबूलेंस से शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया।
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शहर के आवास विकास कॉलोनी निवासी मिथलेश (55) पत्नी वीरेंद्र मिश्रा को 19 अप्रैल को बुखार आया। निजी अस्पताल में दिखाया लेकिन बेहतर उपचार नहीं मिला। शुक्रवार की सुबह उनकी हालत बिगड़ने पर मामो स्थित कोरोना अस्पताल ले जाया गया। जहां ऑक्सीजन लेवल काफी कम होने से उन्होंने दम तोड़ दिया। साथ में पति वीरेंद्र मिश्रा, बेटा एवं एक बेटी थे। महिला की मौत होते ही पति और उनके बेटा-बेटी रोने लगे। दर्द उस समय और बढ़ गया जब महिला के अंतिम संस्कार के लिए बेटे द्वारा फोन करने के बावजूद रिश्तेदार और चिर परिचित नहीं पहुंचे। लगभग तीन घंटे तक शव को अपनों के कांधों का इंतजार रहा। पति वीरेंद्र मिश्रा ने बताया कि शव को निजी एंबुलेंस से अंतिम संस्कार के लिए सोरों ले जाया गया।
बेटी की हालत बिगड़ी
जैसे ही मां की सांसें थमी अस्पताल में मौजूद बेटी भी सुधबुध खो बैठी। हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसका ऑक्सीजन लेवल भी कम हो रहा है।
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वर्जन-
- मानवीय संवेदनाएं जरूरी हैं। यदि ऐसा कोई मामला प्रशासन के सामने आता है कि शव के अंतिम संस्कार में समस्या आ रही है तो प्रशासन मानवीय आधार पर पूरी मदद करने को तैयार है।
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- ललित कुमार, एसडीएम।
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