बीमारी और आर्थिक तंगी लोगों को मानसिक रोगी बना रही है। इनमें युवाओं की संख्या ज्यादा है। फतेहाबाद रोड स्थित होटल में आयोजित इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी की दो दिवसीय कार्यशाला के अंतिम दिन डॉक्टरों ने ये बातें कहीं। कहा कि ऐसे युवा आत्महत्या तक कर रहे हैं। उनकी काउंसिलिंग बहुत जरूरी है।
कार्यशाला के अध्यक्ष डॉ. सागर लवानियां ने कहा कि कैंसर, किडनी, संक्रमण, त्वचा रोग या लंबे समय की बीमारी में धन अधिक खर्च होता है। इससे मरीज तनाव और अवसाद के शिकार हो रहे हैं। मर्ज के इलाज के अलावा मानसिक रोग विशेषज्ञों से भी परामर्श जरूरी है।
लंदन से आए डॉ. हरविंदर सिंह बैस ने ऑटिज्म के मरीजों के उपचार के बारे में बताया। मुंबई से आए फिल्म निर्माता अमित राय ने बताया कि बच्चों को यौन शिक्षा देने के बारे में बताया। डॉ. कौस्तुभ चक्रवर्ती ने कहा कि किडनी दाता और किडनी लेने वाले भी मानसिक विकार के शिकार हो रहे हैं। इनकी भी काउंसिलिंग जरूरी है। डॉ. जेपी नारायण, डॉ. मनु अरोरा, डॉ. मुदित खुराना आदि ने भी व्याख्यान दिए।