अवैध न्यू लाइट हॉस्पिटल में प्रसूता की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है। टीम को अस्पताल में मिले रजिस्टर में 60 से अधिक आशाओं के नाम और फोन नंबर मिले हैं। इसकी सूची सीएमओ को भेज दी है। इनकी जांच शुरू हो गई है। आरोप साबित होने पर बर्खास्त किया जाएगा।
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सीएचसी अधीक्षक डॉ. जितेंद्र वर्मा ने बताया कि न्यू लाइट हॉस्पिटल में प्रसूता की मौत के बाद जांच करने गए थे। इसी दौरान केबिन में रजिस्टर रखा था, जिसमें 60 से अधिक आशाओं के नाम और फोन नंबर मिले हैं। आशंका है कि ये गर्भवती महिलाओं को इसके यहां प्रसव कराने के लिए भेजती हैं। इसके एवज में कमीशन मिलता होगा। इसकी जानकारी सीएमओ को भेज दी है। सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि इन आशाओं के जनवरी से दिसंबर तक सरकारी अस्पताल में प्रसव और गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण की जांच करा रहे हैं। गर्भवती महिलाओं के बयान भी लिए जाएंगे। निजी अस्पताल में प्रसव कराए जाने पर इनको बर्खास्त किया जाएगा।
झोलाछाप के इंजेक्शन से प्रसूता की हुई थी मौत
बीते बुधवार को जैतपुर के क्यारी गांव की सुमन (30) के प्रसव पीड़ा होने पर इसे न्यूलाइट अस्पताल में भर्ती कराया था। पति मुकेश से 80 हजार रुपये भी जमा करा लिए। प्रसव के बाद हालत खराब होने पर झोलाछाप ने 4 इंजेक्शन लगा दिए थे, जिससे उसकी मौत हो गई। शव को एंबुलेंस में छोड़कर स्टाफ अस्पताल छोड़कर भाग गया था। विभाग ने इस पर सील लगाते हुए अज्ञात संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
नवजात घर पहुंचा, नसीब नहीं हुई ममता की छांव
सुमन की मौत के बाद नवजात को बाह सीएचसी के एनबीएसयू (नवजात स्थिरीकरण वार्ड) में भर्ती किया गया था। चिकित्सकीय देखरेख में इलाज चला। बृहस्पतिवार को इसे डिस्चार्ज करते हुए जेठानी रेखा को सौंप दिया है। नवजात अपने घर पहुंच गया, लेकिन ममता की छांव नसीब नहीं हुई। इससे परिजनों की आंखें भर आईं।
झोलाछाप की एक और क्लीनिक सील, 6 को थमाए नोटिस
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बासौनी के गुंगावली गांव में झोलाछाप को बुखार के मरीज का इलाज करते हुए पकड़ा। सीएचसी अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र वर्मा ने बताया कि संचालक के पास चिकित्सकीय डिग्री और क्लीनिक का लाइसेंस नहीं था। इसके सील कर दिया है। तीन दिन में लाइसेंस और चिकित्सकीय डिग्री उपलब्ध कराने को नोटिस दिया है। टीम को जैतपुर में डाॅ. लोधी, डॉ. सलीम, डॉ. राजपूत और डॉ. बंगाली नाम से क्लीनिक संचालित मिली। इनके पास क्लीनिक का लाइसेंस और चिकित्सकीय डिग्री नहीं मिली। इनको नोटिस देकर चिकित्सकीय डिग्री और लाइसेंस तलब किया है। ऐसा न करने पर सील करते हुए मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। जैतपुर में और नंदगवा में टीम को देख कर संचालक अपने क्लीनिक बंद कर भाग खड़े हुए। दोनों के क्लीनिक पर नोटिस चस्पा कर दिए गए हैं।