ताजमहल के वजह से दुनियाभर में पहचान रखने वाली ताजनगरी में लपकागीरी बदनुमा दाग लगा रही है। ताज और आगरा किला समेत सभी स्मारकों पर लपकों के झुंड पर्यटकों को लूटने के लिए तैयार रहते हैं। स्मारकों के आसपास पर्यटन पुलिस की तैनाती कहने भर को है। हकीकत यह है कि यह खेल पुलिस की शह पर चल रहा है। आगरा फोर्ट स्टेशन पर भी लपकों की फौज रहती है, जो ट्रेन से आने वाले पर्यटकों को स्टेशन से बाहर आते ही कैच करने की कोशिश करती है।
ताजगंज के पुरानी मंडी पर पर्यटक वाहनों के रुकते ही उन्हें लपकने की होड़ सी मच जाती है। लपकों के झुंड गाड़ी की तरफ दौड़ पड़ते हैं। पार्किंग से लेकर ताज का दीदार कराने तक एकमुश्त रकम अदा करने का ऑफर दिया जाता है। यदि कोई इनके जाल में नहीं फंसता तो भी उसका पीछा नहीं छोड़ते। बाइक से पीछा करते हैं। दूसरे लपकों को फोन करके पीछे लगा देते हैं।
गेट पर लगा रहता है झुंड
ताज के पश्चिमी गेट पर जाने के लिए ज्यादातर पर्यटक पुरानी मंडी स्थित शाहजहां गार्डन से पैदल निकलते हैं। गार्डन के गेट पर लपके झुंड बनाकर सुबह से खड़े हो जाते हैं। यही कुछ हाल बाकी तीनों गेटों के आसपास भी रहता है। आगरा किला पर भी गेट की ओर जाने वाले रास्ते पर एक तरफ लपकाें का झुंड रहता है।
सिर्फ शांति भंग में कार्रवाई
पर्यटक थाने पहुंच भी जाएं तो रिपोर्ट दर्ज नहीं कराते हैं। शिकायत करके लौट आते हैं। ऐसे में पुलिस भी कार्रवाई नहीं करती है। इसके अलावा अगर पुलिस लपकों को पकड़ भी ले तो सिर्फ शांति भंग मेें कार्रवाई करती है। इससे लपकों के हौसले बुलंद हैं।
हर जगह कमीशनखोरी
एक लपके ने नाम न बताने शर्त पर कहा कि पार्किंग कराने से लेकर स्मारक में जाने की टिकट, दुकान पर खरीदारी, कमरा बुकिंग में भी कमीशन लेते हैं। यदि पर्यटक को गेस्ट हाउस तक पहुंचाते भी हैं तो उसका भी कमीशन फिक्स है। कमरा बुकिंग कर ली जाए तो कमीशन आधा फिक्स है।
चलता है सेटिंग का खेल
जानकारी के मुताबिक, पर्यटकों की सुरक्षा के लिए ताजगंज और टूरिस्ट थाने के अलावा टूरिस्ट पुलिस और निजी गार्ड भी हर वक्त पर्यटकों की सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं। मगर, लपकागीरी पर रोक नहीं लग पा रही है। जब भी मीडिया में मामला उछलता है तो कुछ दिन के लिए लपकों को भगा दिया जाता है।