आगरा के धनौली, टेढ़ी बगिया और भरतपुर में नामी कंपनियों की समान दवाएं मिलने के बाद पुलिस और औषधि विभाग को अंतरराज्यीय नेटवर्क का संदेह है। अब राजस्थान और मध्यप्रदेश में अवैध गोदामों की तलाश तेज कर दी गई है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि कार्रवाई के डर से दवाओं को ठिकाने लगाया जा रहा है।
धनौली-टेढ़ी बगिया और फिर बयाना में नामी कंपनियों की समान दवाएं मिलने से पुलिस को अंतरराज्यीय गैंग के सुराग मिले हैं। पुलिस-औषधि विभाग को राजस्थान, मध्यप्रदेश में और अवैध गोदाम होने की आशंका है। इसकी जांच तेज कर दी गई है।
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पुलिस को 29 सितंबर को धनौली के अवैध गोदाम में पांच करोड़ रुपये की दवाएं मिलीं थीं। ये नामी कंपनियों की थीं। इनके नकली होने की आशंका है। इसके बाद टेढ़ी बगिया में नाले-झाड़ियों और भरतपुर में खेत में बने कुआं में भी भारी मात्रा में दवाएं मिलीं। ये भी एंटीबायाेटिक, एलर्जी, मधुमेह समेत अन्य मर्ज की हैं। तीनों जगह से मिली दवाएं देश-विदेश की नामी पांच कंपनियों की हैं।
वर्ष 2025 में फव्वारा में सीज की गईं 71 करोड़ रुपये की दवाओं से मिलान करने पर भी ये समान हैं। ऐसे में पुलिस और औषधि विभाग को आशंका है कि अंतरराज्यीय गैंग है जो कार्रवाई के डर से दवाओं को अवैध गाेदाम से निकालकर नष्ट करा रहा है। यमुना किनारे भी भारी मात्रा में दवाएं जलाई गईं। औषधि निरीक्षक आशुतोष मिश्रा ने बताया कि आशंका है कि उत्तर प्रदेश-राजस्थान बॉर्डर पर और गोदाम हो सकते हैं, जहां दवाएं छिपाकर रखी हों। संबंधित क्षेत्र की पुलिस और औषधि विभाग से भी संपर्क किया है।
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पुडुचेरी में पकड़ी गई थी फैक्टरी
बीते साल नामी कंपनियों के नाम से नकली दवाएं बनाकर बाजार में खपाने का अंतरराज्यीय गैंग पकड़ा गया था। 71 करोड़ रुपये की दवाएं सीज करने के साथ थोक दवाओं के 58 फर्म के लाइसेंस निरस्त किए। पुडुचेरी में भी टीम ने छापा मारा, जहां से भारी मात्रा में नामी कंपनियों की दवाएं, कच्चा माल और मशीनें बरामद की गईं। यहां से 25 करोड़ रुपये की एडवांस मशीन भी मिली जो पैकिंग में उपयोग की जाती थी।