ताज के प्रतिबंधित दायरे में हुआ निर्माण
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ताजमहल के 500 मीटर के प्रतिबंधित दायरे में एएसआई, एडीए और थाना पुलिस के होते हुए अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के नोटिस सिर्फ कागज का टुकड़ा बनकर रह गए हैं। आरोप है कि पिछले 10 वर्षों में 107 लोगों के ध्वस्तीकरण आदेश हुए लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। वहीं बिना मालिकाना हक कब्जे के आधार पर बिजली, पानी, गैस कनेक्शन भी बंट रहे हैं।
आंकड़ोें के मुताबिक 2015 से 2025 के बीच ताज क्षेत्र में 270 से अधिक अवैध निर्माण हुए। महानिदेशक कार्यालय से 107 मामलों में ध्वस्तीकरण के आदेश किए गए लेकिन एक भी ईंट नहीं खिसकी। बीते 3 माह में ही दर्जनभर से ज्यादा एफआईआर कराई गई हैं। ताजा मामला पूर्वी गेट से करीब 300 मीटर दूर असद गली का है। शिकायतकर्ता रवि गांधी के अनुसार, यहां मकानों का बिना मालिकाना हक के प्रतिबंधित परिधि में निर्माण हो गया। एएसआई ने फरवरी में नोटिस देकर मार्च में एफआईआर कराई लेकिन निर्माण नहीं रुका। अब निर्माण पूरा भी हो गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि बिना मालिकाना हक के नगर निगम और जलकल ऐसे लोगों से कर वसूल रहे हैं। बिजली के मीटर लग रहे हैं। राजनीतिक दबाव के चलते अधिकारी मूकदर्शक हैं। उधर, एसीपी ताज सुरक्षा पीयूष कांत का कहना है कि ध्वस्तीकरण करना पुलिस के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। वहीं, एएसआई अधीक्षण पुरातत्वविद स्मिथा एस का कहना है विभाग नोटिस भेजता है, एफआईआर कराता है लेकिन ध्वस्तीकरण के लिए विभाग में प्रवर्तन दल नहीं है।