तंबाकू-गुटका चबाने की लत से मरीजों के मुंह में दो-तीन जगह कैंसर मिल रहा है। इनमें गाल, जीभ, तालू, खाने की नली के कैंसर अधिक हैं। हालत ये है कि 30-32 साल की उम्र में मुंह में दो-तीन जगह कैंसर फैल गया। एसएन मेडिकल कॉलेज में हुए एक दिवसीय कार्यशाला में चिकित्सकों ने व्याख्यान दिए।
रोहतक से आए डॉ. भूषण कथूरिया ने बताया कि कई ऐसे लती हैं, जिनका दिन भर मुंह तंबाकू से भरा रहता है, एक पाउच खत्म होते ही दूसरा खा लिया। इससे होंठ, गाल और तालू में कैंसर पनप जाता। कैंसर मरीजों में 3 फीसदी ऐसे हैं, जिनमें 2-3 जगह कैंसर मिलता है। इनमें 30-32 साल के युवा भी हैं। हालत गंभीर होने पर जबड़ा तक काटकर बाहर निकालना पड़ता है। ऐसे ही एक 34 साल के मरीज का कार्यशाला में ऑपरेशन भी किया।
दिल्ली के डॉ. अक्षत मलिक ने बताया कि 20-25 साल की उम्र के मरीज भी तेजी से बढ़ रहे हैं। एसएन के कैंसर रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुरभि गुप्ता ने बताया कि तंबाकू में 56 अति खतरनाक तत्व हैं, जो सीधे कैंसर के लिए जिम्मेवार हैं। ओपीडी में हर सप्ताह 30-40 साल के 25-30 नए मरीज आते हैं। इनमें 3-5 मरीजों में एक से अधिक अंगों में कैंसर मिल रहा है। ईएनटी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र कुमार और डॉ. अखिल प्रताप सिंह ने कहा कि कैंसर के लक्षण दिखने पर विशेषज्ञ को दिखाने में देरी न करें। समय पर उपचार से मरीज की जान भी बच रही हैं। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि अब स्पेशियलिटी सेंटर शुरू होने पर कैंसर के गंभीर ऑपरेशन हो रहे हैं, जरूरत पर प्लास्टिक सर्जरी भी की जाती है। कार्यशाला में डॉ. रीतू गुप्ता, डॉ. गौरव खंडेलवाल, डॉ. प्रणय चकौटिया, डॉ. राजीव पचौरी, डॉ. बीएस बघेल, डॉ. साधना बोस, डॉ. प्रशांत जैन, डॉ. दीपिका चौबे, डॉ. साधना सिंह, डॉ. मंजरी बंसल आदि मौजूद रहे।
ये लक्षण तो डॉक्टर को दिखाएं
- मुंह में छाले ठीक न होना, गाल में जख्म बनना।
- मुंह कम खुलना, भोजन निगलने में दर्द होना।
- मुंह-गाल पर सफेद या लाल धब्बे होना।
- होंठ, मुंह, गले में गांठ का होना।
- गाल का आकार बढ़ना या सूजना।
- मुंह में खून आना, सुन्न हो जाना।
- आवाज में परिवर्तन होना।