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40 की उम्र में गर्भधारण तो संतान हो सकती है ‘बुद्धू’

Sat, 16 Jan 2016 01:59 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, आगरा/धर्मेंद्र त्यागी
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मां-पिता की उम्र अधिक होने पर संतान में शारीरिक अक्षमता भी
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ऐसे 100 में से छह अभिभावकों की संतान में मानसिक-शारीरिक विकार
पढ़ाई, कॅरियर, जॉब सेटल और फिर शादी। 40 की उम्र कई मौकोें पर संतानहीनता की वजह तो है ही। संतान ‘बुद्धू’ भी हो सकती है। सबसे बड़ा खतरा आटिज्म (स्वलीनता) का है। उच्च शिक्षित कामकाजी, हाईप्रोफाइल दंपति की संतान में इसकी संभावना सर्वाधिक रहती है। डाक्टरों की मानें तो ऐसे 100 दंपति में से 4-6 की संतान में मानसिक, शारीरिक विकार पाए जा रहे हैं। यूरोपियन देशों में स्थिति और भयावह है। कलाकृति मैदान में पांच दिवसीय 59वीं आल इंडिया कांग्रेस ऑफ आब्स्टेट्रिक्स एंड गाइनेकोलॉजी (आईकोग-2016) के तीसरे दिन अमेरिका के डा. एसटी गेराल्ड ने बताया कि यूरोपियन देश में हर 14वें अभिभावक की संतान में ये समस्या है। कांफ्रेंस सचिव डा. जयदीप मल्होत्रा ने बताया कि 40 की उम्र में तमाम कारणों से पुरुषों के शुक्राणु कम होने के साथ स्वस्थ भी नहीं रहते। मां की उम्र 30-35 साल है तो खतरा और ज्यादा। इससे गर्भ में शिशु का विकास प्रभावित होता है।
मजबूरी में कराने पड़ते गर्भपात
- वरिष्ठ चिकित्सक डा. अनु पाठक बताती हैं कि 35-40 की उम्र में गर्भधारण होने पर अभिभावकों को जांच पर जोर देते हैं। ट्रिपल-एक्स विधि से मां के रक्त और हार्मोंस की जांच से बीमारियों का पता लगाया जाता है। संतान में कई गंभीर बीमारियों का पता चलने पर अभिभावक संतान को पैदा न करने का निर्णय लेते हैं। ऐसे अभिभावक दूरगामी सोच रख कानून के मुताबिक गर्भपात करा लेते हैं।
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ये हो सकती हैं दिक्कतें
- मस्तिष्क का विकास नहीं होना
- बौद्धिक क्षमता कम होना
- बोलने में कठिनाई
- बातचीत में प्रतिक्रिया नहीं देते
- औसत वजन न होना
- कमजोर शारीरिक बनावट

बढ़ेंगे फेफड़े के कैंसर
- बढ़ते प्रदूषण और धूम्रपान की आदत से फेफड़े के कैंसर का खतरा बढ़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के कैंसर मानीटरिंग कमेटी के सदस्य डा. जीएस भट्टाचार्या बताते हैं कि स्मोकिंग की आदत युवाओं में बढ़ रही है, प्रदूषण की मात्रा भी इससे सबसे ज्यादा शिकार युवा बनेंगे, विश्व स्वास्थ्य संगठन इससे चिंतित है। वर्तमान में कुल कैंसर के मरीजों में 75 फीसदी मरीज विकासशील देशों के हैं। निकट भविष्य में भारत और चीन में विश्व के 60 फीसदी कैंसर रोगी होंगे।

सुरक्षा का बजट स्वास्थ्य में हो खर्च
भारत की तरह जच्चा-बच्चा की मौत रोकना पाकिस्तान में भी चुनौती है। लाहौर से आए डा. राशिद लतीफ बताते हैं, दोनों ही देश सुरक्षा बजट में कटौती कर शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च करें तो तस्वीर कुछ और ही हो। किसी भी राजनीतिक प्रश्न से बचते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अचानक पाक पहुंचने को सराहा।  
यूरोप नहीं चाहता भारत-पाक, अफगान एक हों
अफगानी चिकित्सक डा. मोहम्मद हाशिम वजाह बोले कि भारत-पाकिस्तान और अफगानिस्तान एक होने पर यूरोपियन देशों के लिए आर्थिक चुनौतियां खड़ी कर देंगे। इसी कारण यूरोपियन शक्तियां इनमें दरार पैदा करने वाले तत्वों को सहयोग करती हैं। अफगान में भारतीय प्रधानमंत्री के संसद उद्घाटन को उन्होंने सराहा। मेडिकल टूरिज्म पर वो बोले कि कमीशनखोरी के चलते अफगानी यहां इलाज कराने से बचते हैं, सरकार गाइडलाइन तय करेे तो इसकी संभावना बढ़ेगी।  
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भारत में 40 फीसदी प्रसव आपरेशन से
आपरेशन से प्रसव के मामले में भारत अव्वल है। इसका बड़ा कारण महिलाओं की शारीरिक परिश्रम से दूरी और एनमिक होना है। दर्द से बचने के लिए भी महिलाएं आपरेशन को तरजीह देने लगी हैं। आईकोग-2016 में ग्रुप डिस्कशन में ये आंकड़े सामने आए। भारत में 40 फीसदी प्रसव आपरेशन से होते हैं। श्रीलंका में 28 फीसदी, बांग्लादेश में 23 फीसदी है। नेपाल में सबसे कम 8.60 फीसदी है। पैनल ने माना 15 फीसदी से अधिक प्रसव आपरेशन से हो रहें तो इसकी गंभीरता को समझने की जरूरत है। इसमें पाक से डा. राशिद, डा. यूसूफ, बांग्लादेश से डा. फरजाना तस्मीन, नेपाल से डा. एमएन पाल, भूटान से डा. पूर्भ दुरजी, श्रीलंका से डा. रोहाना, भारत के डा. एफ. लुइस रहे।
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