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Agra News: दोस्ती में दे दिया खाता, हो गया फ्रीज

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केस : 1
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न्यू आगरा क्षेत्र की एक कोचिंग में पढ़ने वाले छात्र का सहपाठी ने खाता नंबर ले लिया। चाची के इलाज के लिए परिचित से रकम उधार लेने की बात कहकर पैसे जमा कराए और निकाल लिए। यह रकम साइबर ठगों के खाते से आई थी। साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत मिलने पर छात्र का खाता फ्रीज हो गया। जब वो पुलिस के पास पहुंचा तो जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया। पुलिस ने उसके दोस्त सहित तीन को गिरफ्तार कर लिया।

केस : 2
सदर क्षेत्र के एक ट्रैवल एजेंसी संचालक का खाता जम्मू कश्मीर पुलिस ने फ्रीज कर दिया। इस पर संचालक ने साइबर सेल में संपर्क किया। इस पर पुलिस ने पूछताछ की। पता चला कि उन्होंने एक दुकान पर पेमेंट किया था। दुकानदार ने ऑनलाइन 5 हजार रुपये उनके खाते में भी भेजे थे। यह रकम साइबर ठगी से आई थी। मामले में ट्रैवल एजेंसी संचालक की संलिप्तता नहीं पाई गई। पुलिस ने पत्राचार करके खाता खुलवाया।
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आशीष शर्मा
आगरा। साइबर ठगी के यह दो मामले सिर्फ उदाहरण हैं। आगरा के 1,157 खाते पुलिस के रडार पर हैं। इनमें ठगी की रकम जमा कराई गई। इन खातों का डाटा सामने आने के बाद पुलिस जांच में जुटी है। इनमें 250 खाते सत्यापन में फर्जी दस्तावेज से खुले हुए निकले। 100 से अधिक लोगों ने शिकायत करते हुए कहा कि परिचित, मित्र और रिश्तेदार ने धोखे से खाता नंबर लिया। इसके बाद रकम जमा कराई और कुछ देर बाद निकाल ली।
डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि प्रतिबिंब पोर्टल के माध्यम से साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले बैंक खातों और सिमों का सत्यापन किया जा रहा है। आगरा के तकरीबन 1,157 बैंक खातों को चिह्नित किया गया है। इनमें ओटीपी के लिए मोबाइल नंबर का भी प्रयोग किया गया। इन खातों में इस साल करोड़ों की रकम जमा करने के बाद निकाली गई। यह रकम अलग-अलग राज्य के लोगों के खातों से आई थी। उन्होंने साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद इन खातों को फ्रीज कर दिया गया।
250 का सत्यापन पूरा हो चुका है। पुलिस ने घर-घर दस्तक दी। इनमें पता चला कि खातों में जिन लोगों की आईडी लगी थी, उन्होंने खाते नहीं खुलवाए थे। खाते किसी और के निकले। अभी सत्यापन का कार्य जारी है। 100 से अधिक खातों की जांच में पाया गया कि कुछ लोगों ने अपने खातों में परिचित, मित्र और रिश्तेदार के कहने पर रकम जमा कराई थी। ओटीपी भी शेयर किया था। इस पर खातों को फ्रीज कर दिया गया।
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कैनोपी वालों से न लें सिम
आजकल लोग जल्दबाजी में कैनोपी लगाने वालों से सिम खरीद लेते हैं। इन सिम विक्रेताओं के पास कंपनी से वैधता नहीं होती है। कई बार यह लोग एक ही आईडी पर दो या उससे अधिक सिम जारी करा लेते हैं। ग्राहक को एक सिम देने के बाद दूसरे सिम का प्रयोग साइबर ठगों को देने के लिए किया जाता है। डीसीपी सिटी ने बताया कि सिम नेटवर्क प्रदाता कंपनी के अधिकृत विक्रेता से ही लेना चाहिए। कई बार अपराधी पकड़े जा चुके हैं, जिनमें पता चला है कि वह कैनोपी लगाकर सिम बेचने वालों से कम रुपये में चालू सिम लेते थे।
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