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हास्य नहीं, व्यक्ति का स्तर गिरा: सुरेंद्र शर्मा

Sun, 28 Feb 2016 02:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
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ताज लिटरेचर फेस्टिवल में हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा के व्यंग्य बाणों ने हंसाने के साथ ही सोचने पर भी मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि लोगों के साथ दिक्कत ये है कि वे गंभीर काम भी हंसी में करते हैं, जबकि मैं हंसाने का काम भी गंभीरता से करता हूं। कामेडी शो का क्रेज बढ़ने के सवाल पर उन्होेंने तपाक से जवाब दिया कि कल्चर वाले शख्स से कैबरे करने वालों की तुलना क्यों कर रहे हैं।
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सुरेंद्र शर्मा के साथ वरिष्ठ पत्रकार आनंद शर्मा और कवि पवन आगरी ने चर्चा की। पवन ने पूछा कि वे (सुरेंद्र शर्मा) मोदी से ज्यादा विदेश यात्राएं कर चुके हैं। इस पर सुरेंद्र बोले कि अब मोदी ज्यादातर विदेश में रहते हैं इसलिए मैंने देश में रहना शुरू कर दिया है, कम से कम एक ढंग का आदमी तो देश में रहे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि चैनलों की टीआरपी कल्चर के कपड़े उतारने से बढ़ती है, जबकि हमारा हास्य कल्चर को कपड़े पहनाने का काम करता है।
उन्होंने कहा कि नेगेटिव चीजों की लोकप्रियता बढ़ी है, जबकि पॉजिटिव चीजों की कम हुई है। असहिष्णुता सहिष्णुता (टॉलरेंस) के सवाल पर सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि अब लोगों में टॉलरेंस बचा ही कहां है। भाई-भाई में टॉलरेंस नहीं, न्यूक्लियर फैमिलीज के बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण इनटॉलरेंस है। राजनीतिक टॉलरेंस की बात करते हैं। आम जिंदगी में भी टॉलरेंस कम हो गया है। हास्य के फूहड़ता की ओर पहुंचने के सवाल पर बोल, हास्य का स्तर नहीं गिरा, व्यक्ति का स्तर गिरा है।
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उन्होंने हुल्लड़ मुरादाबादी, ओमप्रकाश आदित्य, काका हाथरसी, शरद जोशी, केपी सक्सेना का जिक्र करके कहा कि ये हास्य रस की नींव के पत्थर हैं। जेएनयू प्रकरण को दुर्भाग्यपूर्ण बताया तो साथ ही जोड़ा कि भारतीयता से बड़ी सोच मानवता की है। बोले, ‘जेएनयू से राजनीति हटा दो, सब ठीक हो जाएगा।’
हरियाणा की हिंसा से आहत सुरेंद्र शर्मा बोले, ‘मेरा हरियाणा ऐसा तो नहीं था।’ राहुल गांधी पर कटाक्ष किया कि वह दलितों के घर जाकर खाना खाते हैं, ये क्यों नहीं करते कि दलित उनके जैसा खाना खाएं। मीडिया को सलाह दी कि कोई देश तोड़ने की बात करे तो उसे न छापें। टीआरपी और सर्कुलेशन के लिए देश से खिलवाड़ नहीं करें। ‘क्या पता तुम न रहो, क्या पता हम न रहें..’ कविता से उन्होंने समापन किया।

योग का अर्थ है आत्मचेतना को जागृत करना
ताज लिटरेचर फेस्टिवल के तीसरे संस्करण में शनिवार को होटल क्लार्क्स शीराज में आटोबायोग्राफी आफ ए योगी सेशन में स्वामी ईश्वरानंद और वैदिक स्कॉलर डेविड फ्रॉउले ने योग से अंतर्मन के विकारों को दूर करने पर चर्चा की। स्वामी ने अपने गुरु परमहंस योगानंद की आटोबायोग्राफी का जिक्र किया। बताया कि विश्व में योग के प्रचार-प्रसार में स्वामी योगानंद की इस पुस्तक का कितना प्रभाव पड़ा है।
स्वामी ईश्वरानंद ने कहा कि आत्मा और परमात्मा के मिलन तक योग से पहुंचा जा सकता है। योग ने विज्ञान और धर्म के बीच के अंतर को कम करने का काम किया है। स्वामी योगानंद की बेस्ट सेलर पुस्तक आटोबायोग्राफी आफ ए योगी का जिक्र करते हुए बताया कि ये किताब दुनिया की 36 भाषाओं में प्रकाशित हो चुकी है। योग केवल शरीर का उपचार नहीं करता। योग से शरीर और आत्मा दोनों का उपचार किया जा सकता है। डेविल डेविड फ्रॉउले ने बताया कि आत्मचेतना को जागृत करना ही योग है। पांचों इंद्रियों से ऊपर उठकर ही योग की शुुरुआत होती है। सेशन के अंत में मंडलायुक्त प्रदीप भटनागर ने स्वामी ईश्वरानंद का स्वागत किया।

रोजनामा: यादों को संजोए सेलफोन फोटोग्राफी से
इज दी फोन गुड एनफ: फोटोग्राफर अमित मेहरा और पूनम सक्सेना ने आई फोन और कैमरे से ली गई तस्वीरों के बारे में चर्चा की। आईफोन से ली गई तस्वीरों की पहली किताब प्रकाशित करने वाले अमित का कहना था कि सेलफोन फोटोग्राफी को खत्म कर रहा है, ऐसा कहना गलत है। हम अपने जीवन में घटने वाले हर पल को तस्वीरों में फोन के माध्यम से कैद करके संजोना चाहते हैं। कई लोग तो फेसबुक पर डायरी बना रहे हैं। सोशल मीडिया के प्रभावी होने के कारण फोन फोटो की कद्र बढ़ी है। फेसबुक, ट्विटर जैसी साइटों पर कैमरे की फोटो तो यदा कदा ही मिलेंगी। अमित ने बताया कि कैमरे में लेंस को बदलकर फोटो क्लिक कर सकते हैं मगर फोन का कैमरा फिक्स होता है। ऐसे में दोनों के बीच तुलना करना बेमानी होगा। रोजनामा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि फोन कैमरा अब हर हाथ में है तो इसे बेहतर ढंग से हैंडिल करके यादगार पलों को संजोया जा सकता है। सेल्फी, ग्रुपी समेत कई फोटो पर चर्चा हुई।

सेंसर बोर्ड नहीं ये फिल्म सर्टिफिकेशन बोर्ड: वाणी
वीमेन ऑन टॉप: भाजपा की नेता एवं सेंसर बोर्ड की सदस्य वाणी त्रिपाठी ने कहा कि हम सामाजिक सुरक्षा का दायित्व निभाने को बोर्ड में हैं, ये कहना बकवास है। फिल्म सेंसर बोर्ड नहीं ये फिल्म सर्टिफिकेशन बोर्ड है। कोई निर्देशक कितनी मेहनत करके कोई फिल्म बनाकर लाता है। इसके बाद सेंसर की कैंची चलती है। उन्होंने शेखर कपूर की फिल्म बैंडिट क्वीन का उदाहरण दिया कि किस तरह फिल्म को एक न्यूड सीन के कारण पास नहीं किया गया। निर्देशक ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली। जब तक सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आया फिल्म की पायरेटेड सीडी बाजार में आ चुकी थी। फिल्म निर्देशक केतन मेहता, फीरोज अब्बास और सुधीर मिश्रा के साथ अतुल तिवारी ने चर्चा में हिस्सा लिया। केतन ने बताया कि मर्दानी, नीरजा, जज्बा, मैरीकाम जैसे फिल्मों से नारी सशक्तिकरण की बात कही जा रही है, लेकिन ऐसा नहीं है। हिंदी फिल्मों की पहली सुपरस्टार नाडिया थीं। फीरोज ने मदर इंडिया का जिक्र किया। जोया अख्तर, मेघना गुलजार, फराह खान जैसी निर्देशकों की बात चली। मैं जिंदा हूं, धारावी और चमेली जैसी फिल्मों के निर्देशक सुधीर मिश्रा ने कहा कि बंदनी और साहब बीबी और गुलाम जैसी फिल्मों में भी महिलाओं की भूमिकाएं सशक्त थीं। वाणी ने कहा कि महिला प्रधान फिल्में सिर्फ महिलाएं ही बना सकती हैं, ऐसा कहना गलत होगा। क्वीन किसने बनाई। अब्बास ने कहा कि आज भी सोसाइटी का नजरिया महिलाओं के प्रति नहीं बदला है।

खानपान पर हुई चर्चा
कुक बाय दी बुक: सेशन में मारिया गौरेटी, सैफ कुनाल कपूर और सारांश गोयला से पूनम ने खानपान पर चर्चा की। मारिया ने कहा कि अब वो दिन नहीं रहे जबकि अखबार की कटिंग निकालकर रेसिपी बनाई जाए। अब कुकिंग पर कई बुक्स हैं, इंटरनेट पर तमाम रेसिपी के आइडिया हैं। सारांश ने कहा कि किसी जमाने में कुकिंग पर तरला दलाल की रेसिपी ही पढ़ी थीं। इसके बाद संजीव कपूर, बलवीर की किताबों से समय बदला। मारिया ने कहा कि उनकी मां के टिप्स आज भी रेसिपी बनाने में मददगार होते हैं। कुनाल ने बताया कि सभी कुछ कुक बुक्स से पढ़कर ही नहीं किया जा सकता है। बुक्स के आधार पर आइडिया ले सकते हैं, लेकिन उसे पूरी तरह कापी करेंगे तो रेसिपी बिगड़ भी सकती है। उन्होंने इसके उदाहरण देकर समझाया।

शम्मी कपूर की स्टाइल किसी ने कापी नहीं की
जाने माने अभिनेता शम्मी कपूर की बायोग्राफी ‘गेमचेंजर ’ लिखने वाले मोहम्मद रऊफ ने बताया कि शम्मी कपूर की कापी फिल्म इंडस्ट्री में आज तक कोई नहीं कर सका। सलमान में शम्मी की कुछ झलक मिलती है। राजीव कपूर ने भी उन्हें कापी करने की कोशिश की मगर सफल नहीं हो सके। प्रियंका सिन्हा के साथ चर्चा में रऊफ ने बताया कि शम्मी कपूर ने कभी किसी एक हिरोइन को लेकर जोड़ी नहीं बनाई। उन्होंने नूतन, मधुबाला समेत कई हिरोइनों के साथ काम किया।
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