कासगंज। जिले में गंगा नदी के किनारे संस्था वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) जल जीवों के संरक्षण पर कार्य कर रही है। दतलाना में कछुआ संरक्षण के लिए उनके अंडों को सहेजने के लिए घरौंदे बनाए गए हैं। इनमें अंडों को संरक्षित किया गया है। कछुए जब अंडों से बाहर आएंगे तो इन्हें तालाब में छोड़कर पोषण किया जाएगा और इसके बाद इन्हें गंगा में छोड़ा जाएगा।जिले में पहली बार कछुआ संरक्षण की दिशा में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने कार्य किया है। इसे लेकर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ही नहीं पर्यावरणविद और प्रकृति प्रेमी भी उत्साहित हैं। इससे पूर्व अलीगढ़ के सांकरा पर पिछले वर्ष कछुओं के लिए घरौंदे बनाए गए थे। इसके बाद जिले में पहल की गई। लहरा क्षेत्र में कछुओं के अंडे के लिए 18 घरौंदे तैयार किए गए हैं। जिनमें 352 अंडे संरक्षित किए गए हैं। उनकी देखरेख के लिए दो प्रशिक्षित लोगों को तैनात किया गया है। किसी स्थान पर एक साथ मिलने वाले कछुओं के अंडों को एक परिवार के अंडे मानकर एक घरौंदे में संरक्षित किया गया है। जमीन में एक से डेढ़ फुट गहरी खुदाई कर बांस का प्रयोग करके ये घरौंदे बनाए गए हैं। हर परिवार के अंडों के लिए अलग-अलग घरौंदे बने हैं। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के समन्वयक राजेश बाजपेयी का कहना है कि कछुओं के घरौंदे बनाने का कार्य पूरा कर लिया गया है। गंगा नदी के किनारे रहने वाले डेढ़ सौ किसानों को इसके लिए प्रशिक्षित भी किया गया है कि वह कछुओं के अंडे खोजकर घरौंदों तक पहुंचाएं। जिले में दतलाना से कादरंगज तक यह अभियान चलाया गया। अब दतलाना से जुड़े लहरा इलाके में कछुओं के घरौंदे बनाए गए हैं।