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शहर में सबसे पहले गोवर्धननाथ मंदिर में खेली जाती है होली

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कासगंज में होली पर्व पर गोवर्धन नाथ मंदिर से निकलने वाली फूलडोल यात्रा का फाइल फोटो - फोटो : KASGANJ
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कासगंज। होली महोत्सव की शुरूआत नगर में सबसे पहले गली बौहरान के गोवर्धननाथ मंदिर से शुरू होती है। यह परंपरा 125 वर्षों से अधिक पुरानी बताई जाती है। पहले पूजा अर्चना के बाद गोवर्धननाथ मंदिर में रंग गुलाल और फूलों की होली खेली जाती है। इसके बाद शहर में फूलडोल यात्रा निकालकर रंग गुलाल उड़ाकर रंगों की होली शुरू की जाती है। यह परंपरा निरंतर जारी है। मारवाड़ी समाज इस परंपरा का निर्वहन करता है।
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यह फूल डोल शोभायात्रा फाल्गुन के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को निकाली जाती है। सबसे पहले मंदिर में गोवर्धननाथ महाराज की परंपरागत तरीके से पूजा अर्चना की जाती है। इसके बाद होली महोत्सव शुरू होता है। पहले यह यात्रा प्रभुपार्क से निकाली जाती थी। मुख्य रथ पर गुलाल की बोरियां रखीं होतीं थीं। पानी की बौछार के लिए शोभायात्रा में फुहारे भी चलते थे, लेकिन अब परंपराओं में कुछ बदलाव हुआ है। अब यह यात्रा गोवर्धननाथ मंदिर से ही निकाली जाती है और अब रंगों का इस्तेमाल नहीं होता। केवल गुलाल और चंदन से ही होली की शुरूआत होती है। गोवर्धननाथ मंदिर में पूजा अर्चना और फूल डोल यात्रा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं व पुरुष जुटते हैं। बैंड बाजे और पूरी सजधज के साथ यात्रा निकाली जाती है। इसी के साथ ही शहर में रंगों की होली शुरू होती है।
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