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अबीर-गुलाल के ज्वार में डूबा वृंदावन, भक्तों ने बिहारीजी संग खेली होली, मंदिर में छाए रंगों के बादल

Sat, 07 Mar 2020 12:02 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा

सार

कारे पै चढ़ गयौ लाल गुलाल, उड़ावत हांसी वृंदावन गोरी
 
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भक्तों ने बिहारीजी संग खेली होली - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हाथ में फूलों की छड़ी, सिर पर मोर पंख, गालों पर सुर्ख लाल गुलचा और होठों पर भक्तों के लिए मनमोहक मुस्कान। इन सब पर भी जब रसिकों ने तीन जगह से घुमावदार मखमली पोशाक धारण किए हुए ठाकुर बांके बिहारी के ऊपर भर-भर मुठ्ठी गुलाल फेंका तो मानो ब्रह्मांड का सारा आनंद बिहारी जी के आंगन में उतर आया।
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जोर-जोर से राधे-राधे की गूंज चारों और से बोलते हुए भक्तों के उड़ाए गुलाल से मंदिर सतरंगी हो गया। सुबह से लेकर शाम तक लाखों श्रद्धालु ठाकुर जी की एक झलक पाने को बेताब रहे। रंगभरनी एकादशी पर श्रद्धालुओं की भीड़ के दबाव को देखते हुए बृहस्पतिवार की रात से ही मंदिर प्रशासन तथा गोस्वामीगणों ने तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया था। सुबह जैसे ही बिहारी जी मंदिर के द्वार खुले श्रद्धालुओं ने गुलाल और अबीर उड़ाना प्रारंभ कर दिया।

राजभोग आरती से पूर्व बिहारी जी ने भक्तों के संग फूलों की होली खेली। चारों से मंदिर प्रांगण में फूल ही फूल बरसाए गए। ठाकुर जी द्वारा बरसाए फूलों को भक्तों ने खूब बटोरा। इसके तुरंत बाद ही भक्तगणों ने बिहारी जी पर गुलाल की बारिश कर दी। देखते-देखते बिहारी जी के आसपास गुलाल ही गुलाल दिखने लगा। दोपहर आरती तक श्रद्धालुओं ने खूब गुलाल उड़ाया।
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गोस्वामीगण ने पहले बिहारी जी फिर भक्तों पर उलीचा गुलाल - फोटो : अमर उजाला
सायंकालीन दर्शन लगभग 4:30 बजे खुले इससे पूर्व बिहारी जी का अद्भुत श्रृंगार किया गया। सेवायत पन्नालाल गोस्वामी ने ठाकुर जी का पर्दा उठाने से
पूर्व जोर से जयकार किया श्री बांके बिहारी लाल की जय... बस इसके बाद भक्तगण जैसे बिहारी जी के पास जाने को आतुर हो उठे। हर कोई बिहारी के पास तक जाने को आतुर हो गया। अपने-अपने गुलाल को ठाकुर जी के पास तक पहुंचने की चाहत सभी में देखी गई।

पूरे मंदिर प्रांगण में गुलाल ही गुलाल उड़ने लगा। ठाकुर जी के मनोहारी दृश्य को देखते हुए बरबस ही रसिक श्रद्धालु बोल उठे---- कारे पै चढ़ गयौ लाल गुलाल, उड़ावत हांसी वृंदावन गोरी, 
फैंट गुलाल उडाय अबीर नैन लड़ाय वृंदावन छोरी
रसिक खड़े बांके के द्वारे मांगत एहक नजर भर जोरी
जै रसिया मन भावत-भावत उठि उठि खेल रह्यो है होरी
फागु के भीर अभीरन ते गहि गोविंदै लै गई भीतर गोरी
भाय करी मन की पदमाकर ऊपर नाय अबीर की झोरी
देखते-देखते मंदिर प्रांगण में गुलाल का अंबार लग गया। हर ओर हाथ में गुलाल लिए भक्तगण और बीच में ठाकुर जी। कभी किसी ने लाल गुलाल उड़ाया तो किसी से पीला हर तरफ अलग-अलग गुलाल के बादल छा गए।

किशोरी जी संग खेलते हैं बिहारी जी होली
इस दिन से माना जाता है कि प्रिया-प्रियतम के बीच होली शुरू हो जाती है। किशोरी जी सखियां ललिता और विशाखा जी के साथ मिलकर होली में बिहारी जी को हराने का प्रयास करती हैं। इधर, ठाकुर बांके बिहारी जी भी भक्तों के साथ तथा राधारानी के साथ एक तारतम्य के साथ होली खेलते हैं।

बारिश और कोरोना भी नहीं रोक सकी श्रद्धा की धारा
झमाझम बारिश और कोरोना की दहशत भी श्रद्धालुओं को वृंदावन आने से नहीं रोक सकी। रंगभरनी एकादशी से पूर्व रात को झमाझम बारिश ने दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को एक दफा डरा दिया लेकिन सुबह होते-होते जैसे ही मौसम खुला श्रद्धा के कदम वृंदावन की ओर बढ़ चले।

चारों ओर से वृंदावन में श्रद्धालुओं का आना प्रारंभ हो गया। देखते-देखते मंदिर और परिक्रमा के जाने के रास्ते पर श्रद्धालुओं श्रद्धा बहने लगी। जैसे-जैसे भोर होती गई श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी होती रही। दोपहर होने तक वृंदावन की पंचकोसीय परिक्रमा में खासी भीड़ हो गई। यहां भी श्रद्धालुओं ने जमकर गुलाल उड़ाया।
 
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निधिवन राज में भी उड़ा गुलाल
बिहारी जी के साथ-साथ बिहारी जी की प्राकट्य स्थल निधिवन राज में भी शुक्रवार को जमकर गुलाल उड़ाया गया। निधिवन राज के विक्की गोस्वामी ने बताया कि इस दिन स्वामी श्री हरिदास द्वारा आराध्य श्री ठाकुर बांके बिहारी की होली की लीलाओं का ध्यान करते हैं। इसी क्रम में गोस्वामीगणों द्वारा स्वामी पर भी गुलाल उड़ाया जाता है।
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