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64 खंभा के 12 खंभे गिरासू: सलामती की दुआ मांग रहा सलाबत खां मकबरा; संरक्षण के अभाव में गल गए पत्थर

Fri, 27 Mar 2026 10:04 AM IST
Dhirendra Singh देश दीपक तिवारी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

सलाबत खां का मकबरा संरक्षण के अभाव में 64 में से 12 खंभे जर्जर होकर गिरासू हो चुके हैं और 400 साल पुरानी मुगलकालीन कलाकृतियां भी खतरे में हैं। बजट और देखरेख की कमी के चलते यह ऐतिहासिक धरोहर खंडहर में बदलती जा रही है, जिससे इसकी सुरक्षा और संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
 
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सलाबत खां का मकबरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शाही खजाने का अधिकारी, चार हजार सिपाहियों का सरदार सलाबत खां, लेकिन उसका मकबरा महफूज नहीं है। संरक्षण न होने के कारण सलाबत खां के मकबरे के 64 खंभों में से 12 खंभे गलने के कारण गिरासू हो चुके हैं। संरक्षित स्मारक में यह मकबरा शुमार है, लेकिन पत्थरों के गलने और देखरेख न होने से अपने वजूद की सलामती की दुआ मांग रहा है।
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आगरा-दिल्ली हाईवे पर गैलाना मोड़ पर स्थित है सलाबत खां का मकबरा। बृहस्पतिवार को अमर उजाला की टीम जब इस स्मारक पर पहुंची तो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की लापरवाही नजर आई। यहां न कोई सुरक्षा गार्ड तैनात है और न ही पर्यटकों की सुध लेने वाला कोई जिम्मेदार। यह संरक्षित विरासत महज एक कर्मचारी के भरोसे छोड़ दी गई है। यह मकबरा 64 खंभा के नाम से चर्चित है। इसके 12 खंभे गल चुके हैं और लाल बलुआ पत्थर की परतें निकल रही हैं।


 

दो साल से पत्थर रखे, संरक्षण नहीं हुआ
स्मारक के जीर्णोद्धार के लिए वर्ष 2024 में नए पत्थर मंगवाए गए थे, लेकिन विभाग ने बजट जारी नहीं किया। अब परिसर में पत्थर तो पड़े हैं, लेकिन संरक्षण शुरू नहीं हो सका। इस मकबरे में चबूतरे के चारों कोनों पर बने बुर्जों में 400 साल पुरानी नायाब मुगलकालीन पेंटिंग मौजूद हैं। हालांकि, गुंबदों में आई दरारों से होने वाले पानी के रिसाव के कारण यह अनमोल कलाकृति धीरे-धीरे मिट रही है। इसके चारों ओर बिजली विभाग ने गोदाम बना लिया है, जिससे आवागमन भी रुक गया है। स्मारक का पुराना प्रवेश द्वार बंद कर इसे कबाड़खाने में तब्दील कर दिया गया है। मुख्य दरवाजे पर ताला लगा है, जिससे पर्यटक पहुंच ही नहीं पाते।


 
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पिता-पुत्र का अनूठा मिलन
इतिहासकारों के अनुसार, यह आगरा का एकमात्र ऐसा मकबरा है जहां पिता और पुत्र एक ही परिसर में दफन हैं। शाहजहां के दरबार में 4000 सैनिकों के मनसबदार सलाबत खां ने अपने पिता सादिक खां की मृत्यु के बाद 1633-1635 में उनका मकबरा (सफेद गोल गुंबद) बनवाया था। बाद में 1644-1650 के बीच सलाबत का मकबरा भी यहीं बना। अमर सिंह राठौड़ ने भरे दरबार में इन्हीं सलाबत खां की हत्या की थी।
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