मुस्लिम संगठन स्वेच्छा से घर वापसी के कार्यक्रम को जबरन, लालचपूर्ण
धर्मांतरण कहकर देश को भ्रमित कर रहे हैं। धर्मनिरपेक्ष कट्टरपंथियों
द्वारा राष्ट्रवादी शक्तियों के खिलाफ झूठे आरोप लगाने का अभियान चलाया जा
रहा है। हिंदूवादी संगठनों ने यह आरोप लगाते हुए होकर डीआईजी लक्ष्मी सिंह
से धार्मिक उन्माद फैलाने की धाराओं में कार्रवाई की मांग की है।
कथित
धर्मांतरण का विवाद गर्माता जा रहा है। सोमवार को विश्व हिंदू परिषद, बजरंग
दल, गोरक्षा, अधिवक्ता परिषद संगठनों के प्रतिनिधि डीआईजी लक्ष्मी सिंह से
मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि आठ दिसंबर को देवरी रोड स्थित वेद नगर,
कबाड़ बस्ती में ‘घर वापसी कार्यक्रम’ हुआ। परिवारों ने स्वेच्छा से काली
मां की मूर्ति स्थापित की तथा निरंतर चार घंटे तक यज्ञ-हवन आदि धार्मिक
कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था। बजरंग दल के प्रांत सहसंयोजक राकेश त्यागी
ने चेतावनी दी कि उत्तर प्रदेश सरकार के कहने पर प्रशासन एकतरफा कार्रवाई
कर रहा है। उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग
की।
आरएसएस के पदाधिकारी भी शामिल
प्रतिनिधिमंडल में आरएसएस के भी
कई पदाधिकारी शामिल थे। मगर, वह अधिवक्ता परिषद या दूसरे संगठनों के बैनर
तले शामिल हुए। इस संबंध में प्रतिनिधिमंडल की तरफ से एक ज्ञापन भी सौंपा
गया। इस दौरान प्रांत संगठन मंत्री राघवेंद्र सिंह, मंत्री ललित गर्ग,
प्रमेंद्र जैन, प्रांत गोरक्षा प्रमुख सुनील पारासर, मदन वर्मा, दिग्विजय
नाथ तिवारी, धमेंद्र वर्मा आदि मौजूद थे।