हिंदी का भविष्य उज्ज्वल है। वैश्विक स्तर पर यह लोकप्रिय हो रही है। विदेशी युवा भी आकर्षित हो रहे हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर भी हिंदी में कामकाज बढ़ना अच्छा संकेत है।
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शनिवार को अमर उजाला के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के तहत आयोजित वेबिनार में वक्ताओं ने यह विचार रखे। वेबिनार में ‘क्यों छिटक रहे हिंदी से युवा? कैसे हो उनमें हिंदी के प्रति लगाव?’ विषय पर हिंदी माध्यम के शोधार्थियों, विद्यार्थियों के साथ विशेषज्ञों और कवियों ने भी अपनी बात रखी।
हिंदी के छात्रों के लिए रोजगार की राहें खुल रही
हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए रोजगार की राहें खुल रही हैं। विदेश के कई विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है। विदेशी भी हिंदी सीख रहे हैं। गत 10 से 15 वर्षों में इंजीनियरिंग और प्रबंधन के क्षेत्र में विद्यार्थियों का रुझान कम हुआ है। इनमें रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं। इस वर्ष डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में सर्वाधिक आवेदन बीए के पाठ्यक्रम के लिए हो रहे हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने स्टाफ को हिंदी सिखा रही हैं। शिक्षकों की मांग बढ़ी है। - प्रो. प्रदीप श्रीधर, निदेशक, केएमआई, डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि
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हिंदीहैंहमः वेबिनार में शामिल हुए वक्ताओं ने रखे विचार
- फोटो : अमर उजाला
वैश्विक स्तर पर हिंदी लोकप्रिय हो रही
आने वाले दिनों में देश के युवाओं का हिंदी के प्रति रुझान बढ़ेगा। यह वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय हो रही है। यही वजह है कि 42 देशों से युवा केंद्रीय हिंदी संस्थान में हिंदी सीखने के लिए आ रहे हैं। गूगल के अधिकारियों का भी मानना है कि आने वाले दिनों में हिंदी वैश्विक स्तर पर और लोकप्रिय होगी। हिंदी फिल्में और उनके गाने भी हिंदी के प्रसार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। - प्रो. उमापति दीक्षित, विभागाध्यक्ष, नवीकरण एवं भाषा प्रसार विभाग, केंद्रीय हिंदी संस्थान
हिंदी भाषा ही नहीं संस्कार है
हिंदी को बढ़ावा देने के लिए घर से शुरुआत करनी होगी। बच्चों को हिंदी बोलने, पढ़ने के लिए प्रेरित करना होगा। हिंदी भाषा ही नहीं संस्कार है। लोग बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पढ़ाना चाहते हैं। अंग्रेजी बोलते हुए सुनकर खुश होते हैं। इससे भी युवा हिंदी से दूर हो रहे हैं। अंग्रेजियत के प्रभाव में आने से ही बच्चे और युवा संस्कारों से दूर हो रहे हैं। हिंदी भाषा सीधे दिल में उतरती है। नई शिक्षा नीति में मातृभाषा पर जोर दिया गया है। - डॉ. शिखा श्रीधर, विभागाध्यक्ष हिंदी, श्रीमती बीडी जैन गर्ल्स पीजी कॉलेज
शिक्षण संस्थानों में हिंदी को दी जाए प्राथमिकता
शिक्षण संस्थानों में हिंदी को प्राथमिकता दी जाए, इससे छात्र-छात्राओं का रुझान इस भाषा की ओर बढ़ेगा। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अंग्रेजी भाषा को अधिक तवज्जो दी जाती है। इस वजह से भी युवाओं का रुझान हिंदी की ओर कम हो रहा है। नौकरी के लिए होने वाले साक्षात्कार में भी हिंदी भाषा को प्राथमिकता नहीं दी जाती है। व्यवस्था बदलेगी तो युवाओं की सोच भी हिंदी भाषा के प्रति बदल जाएगी। - दीप कुमार गर्ग, शोधार्थी, इतिहास विभाग, डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि
चारु अग्रवाल, पवन आगरी और रुचि चतुर्वेदी बाएं से दाएं क्रमशः
- फोटो : अमर उजाला
अंग्रेजी नहीं हिंदी दिला रही है अब नौकरी
अभिभावकों की सोच की वजह से भी बच्चे और युवा हिंदी भाषा से दूर हो रहे हैं। घर में बोलने से लेकर स्कूलों की पढ़ाई में अंग्रेजी भाषा पर जोर दिया जाता है। अभिभावकों को लगता है कि अंग्रेजी माध्यम से पढ़कर विद्यार्थियों को अच्छी नौकरी मिल जाएगी। जबकि परिस्थितियां बदल रही है। अंग्रेजी के बजाय हिंदी के छात्रों के लिए नौकरी के भरपूर अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। विश्वभर में हिंदी लोकप्रिय हो रही है। भविष्य अच्छा है। - चारू अग्रवाल, शोधार्थी, केएमआई, डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि
रोजगार में हिंदी को वरीयता से बढ़ेगा रुझान
हिंदुस्तान में हिंदी के उत्थान के लिए बात करने की नौबत नहीं आनी चाहिए थी। इसके लिए हमारी व्यवस्था भी जिम्मेदार है। हिंदी के छात्रों के सामने रोजगार पाने की कठिनाई होती है। हालांकि अब हालात बदल रहे हैं। रोजगार में हिंदी भाषा को वरीयता से युवाओं का रुझान इस ओर और बढ़ जाएगा। पूरे देश के युवा हिंदी को समझते और बोलते हैं। वह इसको अपनाकर अच्छा कर सकते हैं। - जूही तिवारी, बीएड की छात्रा, बैकुंठी देवी कन्या महाविद्यालय
सोशल मीडिया पर हिंदी का बढ़ना अच्छा संकेत
युवा सोशल मीडिया पर हिंदी में कविता आदि लिख रहे हैं। हिंदी का चलन तेजी से बढ़ रहा है, यह अच्छा संकेत है। सभी को मिलकर हिंदी को और समृद्ध बनाने की दिशा में प्रयास करना होगा। इसकी शुरुआत घरों से ही करनी होगी। हिंदी पहले भी सर्वश्रेष्ठ थी और युगों तक सर्वश्रेष्ठ रहेगी। ...भाषा के संसार में जय-जय हिंदी होय, हिंदी जैसा प्यार दूजा देय नाय कोय। मैंने गणित विषय का शोधपत्र हिंदी में लिखा है। - डॉ. रुचि चतुर्वेदी, कवयित्री
युवाओं में हिंदी पढ़ने-लिखने की आदत डालें
हिंदी वैश्विक स्तर पर बोली, पढ़ी और समझी जा रही है। इंटरनेट के दौर में यह और समृद्ध हो रही है। युवाओं में अंग्रेजी का प्रभाव अधिक होने की वजह से वह हिंदी की कविता लिखते हैं तो लैटिन भाषा का इस्तेमाल करते हैं। युवाओं में हिंदी को पढ़ने और लिखने की आदत डालनी होगी। तभी वह हिंदी को अच्छे से समझेंगे और अपनी भावनाओं को बेहतर तरीके से व्यक्त कर पाएंगे। साहित्य का सृजन कर सकेंगे। - पवन आगरी, हास्य कवि