हिंदी केवल भाषा नहीं बल्कि विश्व में भारत की एक विशेष पहचान है। हिंदी भले ही कई देशों में बोली जाती है, लेकिन भारत में बोली जाने वाली हिंदी जितनी सहज और स्पष्ट है उतनी दूसरे किसी देश में नहीं। इसके बाद भी हम हिंदी को भूलते जा रहे हैं।
हिंदी बोलने वाले लोगों को जहां हम एक सामान्य नजिरए से देखते हैं तो वहीं अंग्रेजी बोलने वाले हमारे के लिए खास हो जाते हैं। इसे लेकर अमर उजाला के साथ व्हाट्सएप संवाद में हिंदी प्रेमियों ने कहा कि हमें हिंदी के प्रति सम्मान का भाव और विकसित करना होगा। सरकार को भी हिंदी की दशा सुधारने के लिए पहल करनी होगी।
हिंदी हमारे देश की पहचान है। इसके बाद भी हमारे कार्यालयों से लेकर सदन तक किसी भी भाषा को बोलने की छूट है। इस पर सरकार को ध्यान देना होगा। सदन और कार्यालयों में हिंदी बोलना अनिवार्य करना चाहिए।
-सुमित कुमार सिंह, बीईओ
हिंदी के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करने वाले वक्ता
- फोटो : अमर उजाला
जब भी बात हिंदी की आती है तो हम सोचते हैं कि हिंदी का क्या विकास होगा। लेकिन ये सच है कि हिंदी में शिक्षण को बढ़ावा देकर और हिंदी भाषियों को रोजगार देकर सरकार हिंदी को आगे बढ़ाने का काम कर सकती है। -प्रीती यादव, सहायक अध्यापक
प्राचीन काल से ही हिंदी संस्कृति और सभ्यता की भाषा रही है। कोरोना काल में जहां पाश्चात्य सभ्यता से जुड़ी हाथ मिलाने की प्रथा से लोग नमस्कार पर आ गए है। वैसे ही एक दिन हिंदी की महत्ता को भी लोग जरूर समझेंगे। -अर्चना सिंह, प्रधानाध्यापक
प्रतियोगी परीक्षाओं को सरकार द्वारा हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में कराया जाता है। इसमें बदलाव करना होगा। केवल अंग्रेजी वाले भाग को छोड़कर बाकी पूरी परीक्षा हिंदी में ही होनी चाहिए। इसके लिए सरकार को निर्णय लेना चाहिए। सुखेंद्र प्रताप सिंह, शिक्षक प्रशिक्षक