हिंदी केवल भाषा नहीं बल्कि विश्व में भारत की एक विशेष पहचान है। हिंदी भले ही कई देशों में बोली जाती है, लेकिन भारत में बोली जाने वाली हिंदी जितनी सहज और स्पष्ट है उतनी दूसरे किसी देश में नहीं। इसके बाद भी हम हिंदी को भूलते जा रहे हैं।
हिंदी बोलने वाले लोगों को जहां हम एक सामान्य नजिरए से देखते हैं तो वहीं अंग्रेजी बोलने वाले हमारे के लिए खास हो जाते हैं। इसे लेकर अमर उजाला के साथ व्हाट्सएप संवाद में हिंदी प्रेमियों ने कहा कि हमें हिंदी के प्रति सम्मान का भाव और विकसित करना होगा। सरकार को भी हिंदी की दशा सुधारने के लिए पहल करनी होगी।
हिंदी हमारे देश की पहचान है। इसके बाद भी हमारे कार्यालयों से लेकर सदन तक किसी भी भाषा को बोलने की छूट है। इस पर सरकार को ध्यान देना होगा। सदन और कार्यालयों में हिंदी बोलना अनिवार्य करना चाहिए।
-सुमित कुमार सिंह, बीईओ