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Agra News: निशाने पर उच्च शिक्षित युवतियां, धर्मांतरण के बाद तय होता था काम

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आगरा। अवैध धर्मांतरण के आरोपी अब्दुल रहमान ने पुलिस की पूछताछ में कई राज खोले हैं। उसने बताया कि धर्मांतरण कराने वाली युवतियों और युवकों की घर वापसी आसान नहीं होती थी। उनका ब्रेनवाॅश इस कदर किया जाता था कि वह कभी वापसी की सोच भी नहीं सकें। उन्हें कोई न कोई जिम्मेदारी दे दी जाती थी। हर काम के लिए फंडिंग देश-विदेश के लोग किया करते थे।
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अब्दुल रहमान से पुलिस की पूछताछ में पता चला कि गिरोह के निशाने पर उच्च शिक्षित युवतियां अधिक रहती थीं। वह किसी न किसी तरह परिवार से परेशान होती थीं। इससे वह आसान टारगेट होती थीं। उनके जाल में फंसने के बाद परिवार और समाज के लोग कबूल नहीं करते हैं। इस कारण वो न चाहकर भी बाहर नहीं निकल पाती हैं।
जिन युवतियों का धर्म परिवर्तन होता था, उनका निकाह भी मुस्लिम युवकों से कराया जाता था। बच्चे होने पर उनके नाम भी मुस्लिम ही रखे जाते थे। उनका पूरा परिवार उस सरकार के लिए वोट करता था, जो मुस्लिमों के साथ रहती थी। दूसरों का विरोध किया जाता था।
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मास्टरमाइंड के बेटों ने उगले कई राज
अवैध धर्मांतरण गिरोह के मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान के बेटों अब्दुल्ला, अब्दुल रहीम और साथी जुनैद कुरैशी को पुलिस ने बृहस्पतिवार कोर्ट में पेश किया। इस दाैरान कड़ी सुरक्षा रही। उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस ने तीनों आरोपियों से कई घंटे तक पूछताछ की। इसमें कई जानकारी हाथ लगी हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि धर्मांतरण गिरोह के लिए देश-विदेश से फंडिंग हो रही थी। कई राज्यों के लोग मदद करते हैं। गिरोह में शामिल सदस्यों को कमीशन दिया जाता था। इससे ही खर्च चलता था। अब्दुल रहमान को अच्छी-खासी रकम मिल रही थी। अब्दुल रहमान का छोटा बेटा अब्दुल रहीम फेरी लगाकर जूते बेचता था। उसने भोपाल की युवती का धर्मांतरण कराया। इसके बाद उससे ही निकाह कर लिया। उसे अपने साथ ही रख रहा है।
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