सूर सरोवर पक्षी विहार में अत्याधुनिक बर्ड इंटरप्रिटेशन सेंटर बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है, जहां 65 प्रजातियों के पक्षियों की जानकारी, आवाज और जीवनशैली को डिजिटल माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। इससे पर्यटकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों को पक्षियों को समझने का नया अनुभव मिलेगा।
प्रदेश के प्रमुख पक्षी विहारों में शामिल सूर सरोवर जल्द ही पर्यटकों और पक्षी प्रेमियों के लिए नई पहचान बनाने जा रहा है। यहां वन विभाग की ओर से अत्याधुनिक बर्ड इंटरप्रिटेशन सेंटर स्थापित करने का प्रस्ताव भेजा गया है। यहां करीब 65 प्रजातियों के पक्षियों की विस्तृत जानकारी, उनकी आवाज, जीवनशैली और संरक्षण से जुड़ी जानकारियां उपलब्ध होंगी। इससे आगंतुकों को पक्षियों को समझने और पहचानने का नया अनुभव मिलेगा।
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अब तक सूर सरोवर आने वाले पर्यटकों को केवल 10 से 15 प्रजातियों के पक्षियों की जानकारी चित्रों और सूचना बोर्डों के माध्यम से मिल पाती थी। पक्षियों की पहचान और उनके बारे में विस्तृत जानकारी का कोई समग्र माध्यम उपलब्ध नहीं था। नया इंटरप्रिटेशन सेंटर शुरू होने के बाद यह कमी दूर हो जाएगी और एक ही स्थान पर विभिन्न प्रजातियों से जुड़ी वैज्ञानिक एवं रोचक जानकारियां उपलब्ध होंगी।
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सेंटर में डिजिटल डिस्प्ले, ऑडियो-वीडियो प्रेजेंटेशन और इंटरैक्टिव तकनीक का उपयोग किया जाएगा। यहां आने वाले पक्षी प्रेमी, विद्यार्थी विभिन्न पक्षियों की आवाज सुन सकेंगे और यह जान सकेंगे कि कौन-सा पक्षी किस मौसम में आता है, उसका प्राकृतिक आवास क्या है और वह पारिस्थितिकी तंत्र में क्या भूमिका निभाता है। इससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों और प्रकृति प्रेमियों को विशेष लाभ मिलेगा।
सूर सरोवर पक्षी विहार के रेंजर अंकित यादव ने बताया कि प्रवासी और स्थानीय पक्षियों का महत्वपूर्ण ठिकाना है। सर्दियों के मौसम में यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में पक्षी पहुंचते हैं। वन विभाग को उम्मीद है कि इंटरप्रिटेशन सेंटर शुरू होने के बाद यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी और इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके लिए हमने बर्ड इंटरप्रिटेशन सेंटर का प्रस्ताव शासन को भेजा हुआ है।
यह होगा खास
- 65 प्रजातियों के पक्षियों की विस्तृत जानकारी
- पक्षियों की आवाज सुनने की विशेष व्यवस्था
- डिजिटल और ऑडियो-वीडियो आधारित प्रस्तुति
- छात्रों और शोधार्थियों के लिए अध्ययन सामग्री
- पक्षी संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा