कासगंज। जिले में हेपेटाइटिस-बी के बाद अब हेपेटाइटिस-सी की भी दस्तक हो चुकी है। यह बीमारी तेजी से फैल रही है। इस वर्ष भी मात्र चार माह में 22 मरीज इस बीमारी के चिह्नित हो चुके हैं। इसमें गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। स्थिति यह है कि स्वास्थ्य विभाग नवजातों को इस बीमारी से बचाने के लिए टीकाकरण नहीं करता।हेपेटाइटिस-सी मूल रूप से लिवर की बीमारी है, जो वायरल संक्रमण से होती है। इसे काला पीलिया के नाम से भी पहचाना जाता है। यह लिवर को नुकसान पहुंचाती है। किसी व्यक्ति में इस बीमारी की चपेट में आने के बाद आसानी से पता नहीं चलता। इसके लक्षण सामने आने में 10 से 20 साल तक का समय लग जाता है। जिले में सरकारी अस्पतालों में हेपेटाइटिस-सी की जांच के तो इंतजाम हैं, लेकिन वायरल लोड की जांच नहीं हो पाती। इस बीमारी के उपचार के लिए भी कोई इंतजाम नहीं हैं। विभाग के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की हेपेटाइटिस-बी और सी दोनों की जांच होती है। विभाग की ओर से नवजातों को 12 जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए जो टीकाकरण किया जाता है उसमें हेपेटाइटिस-बी के तो टीके लगाए जाते हैं, लेकिन हेपेटाइटिस-सी के टीकाकरण की कोई व्यवस्था नहीं हैं। जबकि जिले में पिछले तीन सालों से मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है।