उन्होंने बताया कि पूरी प्रक्रिया में करीब 10 से 12 लाख रुपये खर्च होते हैं। ये सर्जरी दिल्ली, मुंबई समेत मेट्रो शहरों में अधिक हो रही है। सर्जरी कराने वालों में 90 फीसदी युवतियां हैं, जो शादी-नौकरी, मॉडलिंग के लिए इसे अपनाती हैं। इसके अलावा टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने, टेढ़ी-मेढ़ी हड्डियों को सीधा करने, संक्रमण से हड्डी अविकसित होने पर आकार बराबर करने में भी ये तकनीक उपयोग की जा रही है। ये तकनीक रूस के डॉ. गैवरिल इलिजारोव ने विकसित की थी, उनके नाम से ही इसे जाना जाता है। आयोजन अध्यक्ष डॉ. अरुण कपूर, सचिव डॉ. अमृत गोयल, डॉ. बृजेश शर्मा, डॉ. संजय धवन, डॉ. अशोक विज, डॉ. अतुल अग्रवाल, डॉ. अतुल कुलश्रेष्ठ, डॉ. संजय चतुर्वेदी, डॉ. रजत कपूर, डॉ. विवेक मित्तल आदि ने भी व्याख्यान दिए।
15 फीसदी युवाओं में गर्दन, कमर और रीढ़ की हड्डी में दर्द
एम्स नई दिल्ली के ट्रामा सेंटर प्रभारी डॉ. कामरान फारूक ने बताया कि टेढ़े-मेढ़े बैठने, लंबे समय तक बैठने, लेटकर या फिर बेतरतीब ढंग से लंबे समय तक मोबाइल-लैपटॉप देखने से 15 फीसदी युवाओं में रीढ़ की हड्डी, गर्दन और कमर में दर्द बढ़ रहा है। दो फीसदी की रीढ़ की हड्डी भी टेढ़ी हो रही है।