सुप्रीम कोर्ट ने वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) देहरादून को ताज ट्रेपेजियम जोन में पेड़ों की गणना करने के लिए प्रस्तावित अपने बजट की फिर से जांच करने का निर्देश दिया। मंगलवार को हुई सुनवाई में जस्टिस अभय एस ओका व जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) की ओर से दी गई समयसीमा बहुत लंबी है और दिल्ली में इसके काम में ‘काफी ओवरलैप’ है।
आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, हाथ्ररस, एटा और भरतपुर के 10,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले ताज ट्रेपेजियम जोन में पेड़ों की गिनती का मामला पर्यावरणविद डाॅ. शरद गुप्ता ने उठाया था। दोपहर में हुई सुनवाई में बेंच ने कहा, हमारा मानना है कि एफआरआई को प्रस्तावित बजट पर पुनर्विचार करने की जरूरत है, क्योंकि दिल्ली में वृक्ष सर्वेक्षण के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल टीटीजेड क्षेत्र में वृक्ष सर्वेक्षण के लिए किया जा सकता है। इसलिए हम एफआरआई को चार सप्ताह के भीतर नया बजट और समयसीमा प्रस्तुत करने का निर्देश देते हैं।
6 साल का समय, 7.77 करोड़ रुपये मांगे थे
शीर्ष अदालत ने मार्च में फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट को टीटीजेड में पेड़ों की गिनती के निर्देश दिए थे। संस्थान ने अदालत में रिपोर्ट पेश की कि इस काम में 6 साल का समय और 7.77 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पेड़ों की गिनती में शामिल टीम का वेतन, संसाधनों पर होने वाले खर्च का ब्योरा संस्थान ने कोर्ट में सौंपा है। मंगलवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने 6 साल का समय ज्यादा बताया और दोबारा नया बजट और समय पेश करने को कहा है। दिल्ली में एफआरआई साढ़े तीन साल की अवधि में तीन चरणों में एक साथ दोनों काम कराएगा।