मैनपुरी। बरनाहल विकास खंड के गांव रेढ़ापुर निवासी कुपोषित डेढ़ वर्षीय बालक की जिला अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। ऐसा ह्म्ब हुआ जब सरकार कुपोषण दूर करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है।
सरकार कुपोषण से बच्चों को बचाने के लिए कई योजनाओं का संचालन कर रही है। गांव-गांव आंगनबाड़ी केंद्र खोले गए हैं। बावजूद इसके बरनाहल थाना क्षेत्र के गांव रेढ़ापुर निवासी जनवेद सिंह के डेढ़ वर्षीय पुत्र गौतम कुपोषण का शिकार हो गया। मंगलवार को परिजन उसे जिला महिला अस्पताल लेकर पहुंचे, यहां से उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। यहां उपचार के दौरान बुधवार की सुबह बच्चे की मौत हो गई।
कुपोषित बच्चों के लिए यह है योजना
कुपोषित बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी बाल विकास एवं स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है। बाल विकास विभाग के कर्मचारी बच्चों की देखभाल पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिसके चलते बच्चों की जान पर नौबत आ रही है। बाल विकास विभाग से संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर महीने में दो बार बच्चों का वजन होना चाहिए, लेकिन कर्मचारी लापरवाही करते हैं।
पुष्टाहार के साथ भोजन की भी है व्यवस्था
शासनादेश के तहत अति कुपोषित बच्चों को प्रतिदिन पुष्टाहार के साथ ही भोजन के पैकिट प्रदान करने की भी व्यवस्था है। विभाग इन सबसे अनजान था। अब बच्चे की मौत पर पर्दा डालने का का प्रयास किया जा रहा है।
फरवरी में टीम जांच के लिए गांव गई थी। उस समय ये बच्चा कुपोषित नहीं था। बच्चे के संबंध में कोई जानकारी नहीं है।
राजवीर वर्मा, बाल विकास परियोजना अधिकारी बरनाहल
बच्चे की दादी सत्यवती को बच्चे का पुष्टाहार समय से दिया गया है। बच्चे की मां उसे लेकर मायके चली गई थी जो अभी हाल ही में लौट कर आई है।
रजनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
बच्चे को जिला महिला अस्पताल से गंभीर हालत में जिला अस्पताल भेजा गया था। यहां किसी प्रकार की जांच नहीं की जा सकी। बच्चे को जिस डॉक्टर ने रेफर किया उसने आखिर बिना जांच के उसे कुपोषित कैसे बता दिया यह समझ से बाहर हैै। मुझे तो बच्चे में सेप्टीसीमिया और एनीमियां के लक्षण दिखे हैं। बच्चे की हालत अधिक गंभीर होने के कारण उसे पोषण पुर्नवास केंद्र में नहीं रखा गया। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।
डॉ. आरके सागर, सीएमएस