आगरा में स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले के पंजीकृत सभी 410 अस्पतालों को अपने यहां निर्धारित अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए पत्र जारी किया है। कैमरों को सक्रिय भी रखना है। जिससे किसी विवाद की स्थिति में पता चल सके कि मरीज का इलाज किसने किया है। विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही है कि अस्पतालों में पंजीकृत चिकित्सक इलाज नहीं कर रहे हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी अरुण कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार, मरीजों के पंजीकरण काउंटर और ऑपरेशन थिएटर (ओटी) के बाहर सीसीटीवी कैमरे तत्काल लगाए जाने के लिए सभी पंजीकृत अस्पतालों को पत्र जारी किया गया है। इसमें इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) आगरा का भी सहयोग मांगा गया है। मुख्य चिकित्साधिकारी का कहना है कि अस्पतालों मरीजों की मौत के बाद विवाद की स्थिति खड़ी हो रही है। मरीज के परिवारीजनों की ओर से आरोप लगाया जाता है कि मरीज का इलाज पंजीकृत चिकित्सक से नहीं कराया गया। इलाज में लापरवाही बरती गई।
शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच के लिए पहुंचती है तो अस्पताल के रजिस्टर में पंजीकृत चिकित्सक का ही नाम होता है। अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरे न लगे होने से इस बात का साक्ष्य नहीं मिल पाता कि इलाज किसने किया है, जबकि अस्पतालों में इलाज के लिए जिस चिकित्सक का नाम मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में पंजीकृत है, वही इलाज कर सकता है।
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श्री महालक्ष्मी हॉस्पिटल की जांच पूरी नहीं
श्री महालक्ष्मी हॉस्पिटल बोदला में प्रसूता की मौत की जांच अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि पंजीकृत चिकित्सक ने ही ऑपरेशन किया या फिर किसी और ने। चिकित्सक ने अपना बयान दर्ज करा दिया है, खुद ऑपरेशन करने का दावा किया है। स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस के माध्यम से सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग व चिकित्सक की लोकेशन मांगी है। मलपुरा के धनौली स्थित हॉस्पिटल में महिला मरीज की मौत में भी इलाज में लापरवाही की शिकायत की गई है। यहां भी स्वास्थ्य विभाग को सीसीटीवी कैमरे की रिकार्डिंग नहीं मिल पा रही है।
कैमरे लगाने में कोई बुराई नहीं
आईएमए के सचिव डॉ. पंकज नगाइच का कहना है कि अस्पतालों में प्रवेश द्वार, पंजीकरण काउंटर व ओटी के बाहर कैमरे लगाने में कोई आपत्ति नहीं है। आईएमए के ज्यादातर अस्पतालों में पंजीकरण काउंटर के पास कैमरे लगे भी हैं। आईएमए के अस्पतालों में पंजीकृत चिकित्सक की उपचार करते हैं, जो चिकित्सक ऑन कॉल बुलाए जाते हैं, उनके संबंध में भी मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में शपथपत्र दिया जाता है।