एनएच-2 बस नाम का हाईवे बनकर रह गया है। तीन साल के भीतर हाईवे संकरी सड़क में तब्दील हो चुका है। डिवाइडरों का अता पता नहीं है। लोहे की रेलिंग भी उखड़ चुकी हैं। जगह-जगह होर्डिंग और अतिक्रमणों का जाल। बेढंगे स्पीड ब्रेकर, तमाम कट और सर्विस रोड किनारे लगे मिट्टी के ढेर। रुनकता से लेकर वाटर वर्क्स चौराहे तक तो कहीं से नहीं लगता कि यह नेशनल हाईवे है। तमाम अव्यवस्थाओं के बाद भी एनएचएआई के अफसर आंखें मूंदे बैठे हैं।
एनएच-2 पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी आफ इंडिया ने तकरीबन तीन साल पहले फ्लाईओवर, सिक्सलेन प्रोजेक्ट के काम शुरू किए थे। तब से हाईवे की सूरत ही बिगड़ गई। रुनकता चौराहे पर अंडरपाथ का काम अधूरा पड़ा है। इसके आगे चलेंगे तो हाईवे के दोनों ओर की सर्विस लेन को सिक्सलेन में बदलने का काम चल रहा है। दोनों ओर मिट्टी के ढेर लगे हुए हैं। शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। हाईवे की लाइट्स भी खराब पड़ी हैं।
लोगों ने अपनी सुविधा के मुताबिक हाईवे को काटकर कट बना लिए हैं। इन कटों पर अकसर ही हादसे होते हैं, लेकिन एनएचएआई को इन सबसे कोई सरोकार नहीं है। उनके अफसरों का फोकस एनएच-2 पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर, पुल और अंडरपाथ पर है। सिक्सलेन के लिए दो साल पहले अरतौनी से लेकर सिकंदरा तक के बाजार उजाड़ दिए, अब यहां अस्थायी अतिक्रमण कर लिए गए हैं, लेकिन सिक्सलेन का काम भी आगे नहीं बढ़ सका है।
सिकंदरा से आगे बढ़ने पर खंदारी फ्लाईओवर बनकर तैयार हो चुका है मगर यहां भी बगैर प्लानिंग के वाहन बेतरतीब दौड़ रहे हैं। फ्लाईओवर खोलने से पहले डिवाइडर और सर्विस रोड को नहीं बनाया गया। कटों को भी बंद नहीं कराया गया। रविवार को जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां सर्विस रोड की बाउंड्रीवाल टूटी पड़ी है। बाईपास संघर्ष समिति के अध्यक्ष मुरारीलाल गोयल का कहना है कि हाईवे तो बस नाम का है। हालात किसी मोहल्ले की सड़क से भी खराब हैं।
हाईवे पर चल रहा है काम, जल्द होगा सुधार
एनएच-2 पर फ्लाईओवर और सिक्सलेन के काम चल रहे हैं। ऐसे में सर्विस लेन और हाईवे की सड़कें एक ही हो गई हैं। जल्द ही सिकंदरा से सुल्तानगंज की पुलिया तक सर्विस लेन और हाईवे के बीच गार्ड रेल लगाई जाएंगी। सुरक्षा मानकों का भी ख्याल रखा जाएगा।
-मोहम्मद शफी, प्रोजेक्ट निदेशक, एनएचएआई