हरी सिंह लगातार चौदह घंटे से एंबुलेंस चला रहा था। सोमवार की शाम को करीब पांच बजे एंबुलेंस लेकर निकला था। पहले चंडीगढ़ जाना था लेकिन जब जहीर की मौत रास्ते में हो गई तो परिवार वालों ने एंबुलेंस को बिहार तक के लिए ही बुक कर लिया था। बताया जाता है कि केवल दिल्ली में थोड़ी देर के लिए एंबुलेंस रुकी थी।
हरी सिंह जम्मू में बख्शी नगर का रहने वाला था। वह सहयोग संस्था की एंबुलेंस चलाता था। सोमवार की शाम को करीब साढ़े चार बजे हरी सिंह एंबुलेंस में जहीर का शव लेकर मेडिकल कॉलेज से निकला था। पहले पीजीआई चंडीगढ़ जाना था लेकिन रास्ते में ही जब मौत हो गई तो जहीर की पत्नी ने एंबुलेंस को अपने गांव तक के लिए बुक कर लिया था। हरी सिंह अकेला ही मथुरा तक एंबुलेंस को चलाकर लाया।
बताया जाता है कि रास्ते में दिल्ली से भी कुछ लोग एंबुलेंस में चढ़े थे जिस कारण वहां कुछ देर के लिए गाड़ी रोकी गई वरना तो लगातार चल रही थी। इससे साफ है कि हरी सिंह बुरी तरह से थक गया होगा। एक्सप्रेसवे पर गाड़ी चलाते हुए झपकी आई और एंबुलेंस अनियंत्रित हो गई।