जिले में कांच के हस्तशिल्प का कारोबार तीन साल में दो से पांच करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। कांच की मूर्तियों, किचन वेयर, हस्तशिल्प के जरिए तैयार टेबल लैंप, कपूरदानी, पूजन पात्र, फ्लोवर पॉट, ढोलक के अलावा कांच निर्मित पेड़-पौधे और खेल-खिलौना व शोरूम में रखे जाने वाले फैंसी ग्लास को देश-विदेश में नई पहचान मिली है।
फिरोजाबाद में हस्तशिल्प से जुड़े कांच उत्पाद कांच आयटमों के बाजार में लगातार धाक जमा रहे हैं। तीन साल पहले तक हस्तशिल्प कांच उत्पाद का कारोबार मात्र दो करोड़ रुपये का था अब सात करोड़ रुपये वार्षिक तक पहुंच गया है। ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) योजना का लाभ भी हस्तशिल्पियों को मिला है। कांच से मूर्तियां, फ्लोवर पॉट, कलात्मक डिजाइन वाली टेबल लैंप और फैंसी लाइटों से हस्तशिल्प को अलग पहचान मिली है।
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कांच की मूर्तियों, किचन वेयर, हस्तशिल्प के जरिए तैयार टेबल लैंप, कपूरदानी, पूजन पात्र, फ्लोवर पॉट, ढोलक के अलावा कांच निर्मित पेड़-पौधे और खेल-खिलौना व शोरूम में रखे जाने वाले फैंसी ग्लास को देश-विदेश में नई पहचान मिली है। हस्तशिल्पियों का कहना है कि प्रदेश सरकार की हस्तशिल्प प्रोत्साहन एवं प्रशिक्षण योजना कारगर सिद्ध हो रही है। वर्ष 2016-17 के बीच धरातल पर आई इस योजना के तहत प्रशिक्षण के जरिए अभी तक 300 से ज्यादा हस्तशिल्पी और कांच कामगारों के हुनर को तराशा जा चुका है।
इस तरह बढ़ा कारोबार
वर्ष 2019-20 में सालाना करीब दो करोड़ रुपये वाला हस्तशिल्प आयटम कारोबार तीन वर्ष के अंतराल में सात करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। हस्तशिल्प विपणन एवं प्रोत्साहन योजना भी हस्त शिल्पियों के लिए मददगार बनी है। उद्योग विभाग के अनुसार योजनांतर्गत हर साल करीब 60 हस्तशिल्पियों को आधुनिक टूलकिट के अलावा हस्तशिल्प आयटम तैयार कराने को जरूरी सामान नि:शुल्क उपलब्ध कराए गए हैं।
इन मेलों में सुहाग नगरी के हस्तशिल्पियों की धाक
लखनऊ महोत्सव, ओडीओपी मेला, गोरखपुर महोत्सव, एक्सपो मार्ट नोएडा, दिल्ली हाट आदि में फिरोजाबाद के हस्तशिल्पियों को हर साल विशेष रूप से प्रतिभाग के लिए न्योता मिलता है। इन मेलों में यहां के कांच उत्पादों की धाक है।
हस्तशिल्पी बोले- मिल रही अंतरराष्ट्रीय पहचान
कांच सप्लायर व हस्तशिल्पी कैलाश शर्मा ने बताया कि 'हम कांच आयटम पर अपनी कलात्मक क्षमता को उकेरने का प्रयास करते हें। अच्छी बात है कि हमारे आयटम को अब देश-विदेश में पहचान मिल रही है। आयटम की गुणवत्ता ठीकठाक है। तो फिर मनमाने मेहनताना भी आसानी से मिल जाता है।' वहीं दौकेली के मनोज कुमार का कहना है कि कांच हस्तशिल्प का काम अब कारोबार का रूप ले चुका है। फिरोजाबाद के हस्तशिल्पियों को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने लगी है। कई यूरोपियन व अफ्रीकी देश के कारोबारी हमने से जानकारी साझा करने फिरोजाबाद आते हैं।
मार्केटिंग पर दिया जा रहा जोर
उपायुक्त उद्योग अमरेश पांडेय ने बताया कि हम हस्तशिल्पियों को प्रशिक्षण देने के साथ ही उनके कांच आयटम की ब्रॉडिंग, मार्केटिंग पर जोर दे रहे हैं। परिणाम सामने आ रहे हैं। शहर का हस्तशिल्प अब कारोबारी आकार में बदल रहा है। ओडीओपी योजना शहर के हस्तशिल्पियों के वरदान है।