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लिविंग हिस्ट्री में बोले करजई- अमेरिका ना तो आतंकवाद खत्म कर पाया ना ही धार्मिक कट्टरता

Mon, 23 Apr 2018 09:20 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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अमर उजाला आईपीसीएस की श्रृंखला लिविंग हिस्ट्री में बोलते हामिद करजई - फोटो : अमर उजाला
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आतंक के साये से निकले अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने अमेरिका के अफगानिस्तान में हस्तक्षेप और उसके परिणाम को विफल करार दिया और कहा अमेरिका अमन कायम नहीं कर सकता। 
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आगरा में अमर उजाला और इंस्टीट्यूट ऑफ पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट स्टडीज (आईपीसीएस) की ओर आयोजित ‘लिविंग हिस्ट्री’ श्रृंखला के पहले आयोजन में उन्होंने भारत-अफगानिस्तान के सदियों के रिश्तों व साझा दुख-सुख, उपलब्धियों और भविष्य में दोस्ती की जड़ों को और मजबूत करने पर भी अपनी बात रखी।

अमेरिका पर करजई ने कहा कि वह अफगानिस्तान में धार्मिक कट्टरता और आतंकवाद से लड़कर शांति स्थापित करने आया था, लेकिन न शांति स्थापित हुई और न कट्टरता व आतंकवाद हारे। 
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हामिद करजई - फोटो : अमर उजाला
बीते चार वर्ष में अमेरिकी सेना की मौजदूगी में ही यहां आईएसआईएस पनप चुका है। करजई ने कहा कि अमेरिका आज उनके देश पर सबसे बड़े बम दाग रहा है, नागरिकों को जाने अनजाने मार रहा है। 

बुजुर्गों को उनके बच्चों के सामने जलील किया जाता है, घरों में रात को घुसकर सैनिक दशहत का माहौल बना रहे हैं। इस तरह कट्टरता खत्म नहीं होगी। पड़ोसी देश पाकिस्तान यहां लगातार आतंकी हमले करवा रहा है। 

अमेरिका उसे लताड़ता है, लेकिन ऐड देना जारी रखता है, बीते 16 वर्ष में 3300 करोड़ डॉलर वह दे चुका है। उन्होंने कहा कि धार्मिक कट्टरता को नीति के तहत पैदा किया जाता है। 

अमेरिका और उसके सहयोगी पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में यह नीति सोवियत रूस से लड़ने के लिए अपनाई, लेकिन बुरे परिणाम अफगानिस्तान आज भी भोग रहा है।

भारत के लिए कृतज्ञता जताई 

लिविंग हिस्ट्री में आए मेहमान - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने भारत द्वारा बीते 16 वर्ष में करीब 250 करोड़ डॉलर की अफगानिस्तान को दी गई मदद के लिए कृतज्ञता जताई और कहा कि भारत जैसे विशाल राष्ट्र की कई जरूरतें हैं। 

फिर भी उसने पुनर्निर्माण के दौर में अफगानिस्तान में स्कूल, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई में निवेश किया, बजाय सैन्य हस्तक्षेप के, यह काबिलेतारीफ है। 

दोनों देशों कि रिश्तों पर बामियान बौद्ध प्रतिमाओं के परिपेक्ष्य में कहा कि अफगानिस्तान में 14 सौ वर्ष इस्लाम की मौजूदगी के बावजूद ये प्रतिमाएं बनी रहीं। तालिबान ने इन्हें धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक वजहों से नष्ट किया जिसका खामियाजा उनकी देश की सांस्कृति ने उठाया।
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भारत-चीन-रूस की एकता से बनेगी दुनिया की शक्ति

हामिद करजई - फोटो : अमर उजाला
करजई ने कहा कि भारत-चीन और रूस मिलकर काम करें तो यह क्षेत्र दुनिया की शक्ति बन सकता है। ऐसा होने पर हमारी क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान 10 हजार मील दूर बैठे देश नहीं, बल्कि हम आपस में सहयोग से निकालेंगे। 

उन्होंने कहा कि कहा कि जिस तरह रूस व चीन का सहयोग भारत के लिए फायदेमंद है उसी तरह भारत व चीन का सहयोग अफगानिस्तान के लिए। 

इन महाशक्तियों को आपस में यह सहयोगी वातावरण बनाकर क्षेत्र में समृद्धि लानी होगी, जिससे नागरिकों का जीवन स्तर सुधरेगा जो सभी चाहते हैं।
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