आकाशवाणी में कार्यक्रम अधिशासी एवं तलेगांवकर परिवार के बेहद करीबी श्रीकृष्ण ने बताया कि 15 दिन पहले तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सिकंदरा में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां जांच में कोरोना मिला।
चार दिन पहले ठीक होकर तलेगांवकर घर पहुंच गए थे। फिर से उन्हें निमोनिया की शिकायत हुई। सोमवार को तबीयत बिगड़ने पर फिर से अस्पताल लाया गया। वहां उनका निधन हो गया।
पूरा परिवार संगीत को समर्पित
तलेगांवकर परिवार के सभी सदस्य संगीत को समर्पित हैं। केशव तलेगांवकर के तीनों भाई संगीतज्ञ हैं। पत्नी प्रतिभा सुर ताल की धनी है। दो बेटियों में बड़ी डॉ. मेघा की शादी हो चुकी है। वह और छोटी बेटी शुभा भी संगीतज्ञ हैं।
डॉ. केशव तलेगांवकर ने भारत के साथ ही विदेशों में भी अपनी संगीत साधना का लाभ विदेशी छात्रों को दिया। चीन के अलावा कई यूरोपिय देशों में उन्होंने संगीत की बारीकियों से विदेशी छात्रों को शिक्षा दी। उन्होंने विदेशों में शास्त्रीय संगीत की 300 से अधिक विद्यार्थियों को गायन का प्रशिक्षण दिया।
गजल गायक सुधीर नारायण ने बताया कि पंडित केशव तलेगांवकर संगीत कला केंद्र और पंडित रघुनाथ तलेगांवकर चेरीटेबल ट्रस्ट के संस्थापक और भगवती देवी जैन कन्या महाविद्यालय में संगीत विभाग के सेवानिवृत विभागाध्यक्ष थे। पहले उनके पिता और फिर वह नाद महोत्सव का प्रतिवर्ष आयोजन कराया। यह परंपरा 55 साल से चल रही है। इसमें पंडित रवि शंकर सहित देश के बड़े संगीतज्ञ आ चुके हैं।