गुरु पूर्णिमा की रात को वर्ष का दूसरा ग्रहण दिखाई देगा। यह तीन घंटे तक दिखेगा। वर्ष 1870 में ऐसा दुर्लभ योग था, जो गुरु पूर्णिमा के दिन दिखेगा। चंद्र ग्रहण के चलते मंगलवार शाम साढ़े चार बजे से ही मंदिरों के पट खुल जाएंगे।
विजय नगर निवासी ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय के अनुसार चंद्र ग्रहण गुरु पूर्णिमा के उत्तर आषाढ़ नक्षत्र में लगेगा। यह खंडग्रास चंद्र ग्रहण कहा जा रहा है। चंद्र ग्रहण मंगलवार की रात 1.30 बजे से शुरू होगा। यह मध्य रात्रि 2.58 बजे तक दिखाई देगा। मोक्ष 4.30 बजे सुबह दिखाई देगा।
ग्रहण के दोषकाल वाले समय को सूतक कहा जाता है। यह सूतक नौ घंटे पहले यानि 16 जुलाई को शाम साढ़े चार बजे से शुरू हो जाएंगे। सूतक लगने से मंदिरों के पट बंद कर दिए जाएंगे। 17 जुलाई को सुबह साढ़े चार बजे के बाद ही पट खुलेंगे। ग्रहण की अवधि तीन घंटे रहेगी।