आगरा के लोहामंडी थाने में बीते वर्ष सहायक आयुक्त जीएसटी ने धोखाधड़ी का जो मामला दर्ज कराया, वह जांच में 500 करोड़ से अधिक रुपयों के फर्जीवाड़े का निकला। एसटीएफ और लोहामंडी पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई कर मेरठ से आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया था। शनिवार को लोहामंडी पुलिस ने सभी आरोपियों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। यहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। आरोपी 6 फर्जी फर्मों से इनवाॅयस और ई-वे बिल बनाकर राजस्व का नुकसान पहुंचा रहे थे।
एसटीएफ ने बताया कि 29 जुलाई 2024 को सहायक आयुक्त विनीता श्रीवास्तव की ओर से लोहामंडी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसमें आरोप लगाया था कि कमला नगर में रजिस्टर फर्म शर्मा इंटरप्राइजेज की जांच करने पर यह संचालित होते नहीं मिली। उनके द्वारा हेराफेरी कर टैक्स चोरी की गई है। जांच में पता चला कि गिरफ्तार आरोपी बोगस फर्म बनाकर फर्जी इनवाइस व ई- वे बिल बनाकर अन्य सही फर्मों को इनपुट टैक्स क्रेडिट दिलाते थे।
इसके बदले में उनकी मोटी कमाई होती थी। 500 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी की गई। पुलिस के अनुसार आरोपी प्रदेश के कई शहरों में गिरोह संचालित कर रहे थे। उनके खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई कर संपत्ति भी जब्त की जाएगी। पकड़े गए मेरठ के दिलशाद मलिक, मोहम्मद वसीम, मोहम्मद सोहेल, जावेद मलिक, इकरामुद्दीन और दिल्ली के रमेश पटेल, गौतमबुद्ध नगर के अंकुर तिवारी व गाजियाबाद के स्वतंत्र कुमार तिवारी को जेल भेजा गया है। इनके पास से पुलिस को बिलिंग की 90 नकली मोहरें, 18 मोबाइल, विभिन्न बैंकों की 54 चेक बुक, कई ट्रांसपोर्ट कंपनियों की फर्जी बिल बुक, 54 डेबिट कार्ड और 4 कार बरामद हुई हैं।
लखनऊ के पते पर बनाई थीं छह बोगस फर्में
आरोपियों ने लखनऊ के फर्जी दस्तावेजों के जरिए हर्ष ट्रेडर्स, इंदर इंटरप्राइजेज, आरके इंटरप्राइजेज, राहुल इंटरप्राइजेज, मार्शल इम्पेक्स और कुमार ट्रेडर्स नाम से छह फर्जी फर्में रजिस्टर कराई थीं। झारखण्ड, मध्य प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडू, कर्नाटक, केरल, बिहार, आसाम, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, नई दिल्ली और महाराष्ट्र आदि राज्यों के पतों पर भी बोगस फर्मे बनाकर जीएसटी चोरी की जा रही थी।