12-14 साल की कच्ची उम्र। दुलार की जगह मां-बाप की प्रताड़ना। जब सहा न गया तो घर छोड़ा और ट्रेन में बैठकर गुमनाम सफर पर निकल पड़ीं। आगरा रेल मंडल के प्लेटफार्मों-स्टेशन पर भटकती मिलीं। घर लौटने को भी तैयार नहीं। ऐसी लड़कियों के लिए राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) अभिभावक बन गई है। उन्हें पढ़ाने-लिखाने ही नहीं हुनरमंद बनाने का भी इंतजाम किया है। ‘आपरेशन संरक्षण’ नाम से यह पहल एसपी जीआरपी गोपेश नाथ खन्ना की इजाद है जिसे अमली जामा पहनाने में स्वयंसेवी संस्था चाइल्ड लाइन की मदद ली गई है।
जीआरपी को विभिन्न स्टेशनों पर मिली तमाम लड़कियां जब घर लौटने को तैयार न हुईं तो ‘आपरेशन संरक्षण’ का जन्म हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान से प्रभावित एसपी जीआरपी के प्रयासों से मथुरा में इनके लिए पृथक संरक्षण गृह बनाया गया। अपने मां-बाप से रूठकर घर छोड़ने के बाद स्टेशनों पर भटकती मिली 18 लड़कियों को यहां रखा गया है। सेंटर में तैनात महिला प्रशिक्षकों की मदद से इन्हें कुकिंग, निटिंग, टेलरिंग व अन्य हुनर सिखाए जा रहे हैं। कुछ मार्शल आर्ट और योग सीख रही हैं। ताकि आगे चलकर इनका प्रशिक्षक बन सकें। थोड़ी पढ़ी-लिखी लड़कियों को अंग्रेजी पढ़ाई जा रही है। मकसद है कि ये टीचर या रिसेप्शनिस्ट बन सकें।
ज्यादातर सौतेले मां-बाप की सताई हुई
ज्यादातर लड़कियां सौतेले मां-बाप की सताई हुई हैं। संरक्षण गृह में छह लड़कियां तो ऐसी हैं जिन्हें रोज पीटा जाता था। ऐसी लड़कियों को मिलने के बाद जीआरपी उनके परिवार को सूचना देती है। परिवार वाले आए तो कोर्ट में फिर प्रताड़ित न करने का हलफनामा देने के बाद ही लड़कियां उन्हें सौंपी जाती हैं।
दानदाताओं की भी कमी नहीं
इस नेक काम में दानदाता रसद, साबुन, कपड़ा, फल व लड़कियों की निजी जरूरत के सामान दे जाते हैं। दानदाताओं से नगद राशि नहीं सिर्फ सामान लिए जाते हैं। इस काम में जीआरपी की मददगार चाइल्ड लाइन भी है। इसी की देखरेख में लड़कियों को रखा गया है।
अब आगरा फोर्ट भी शुरू होगा केंद्र
एसपी जीआरपी गोपेश नाथ खन्ना ने बताया कि कुछ लड़कियां तो इतनी परेशान हो चुकी हैं कि बार-बार कहने पर भी वापस जाने को तैयार नहीं हैं। यही देखकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने कोशिश शुरू की गई। अब यही काम आगरा फोर्ट स्टेशन पर भी शुरू होगा। यहां लड़कों को भी संरक्षण दिया जाएगा।