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इस गर्मी में आगरा के लोगों को उठानी पड़ सकती है ये मुसीबत

Sun, 11 Mar 2018 05:00 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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आगरा में इस बार गर्मियों में जिले में पानी की भारी किल्लत हो सकती है। दरअसल मौसम विज्ञानियों का कहना है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष तापमान सामान्य से दो डिग्री अधिक रहेगा। 
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ऐसे में पानी की डिमांड बढ़ेगी, लेकिन सवाल यह है कि सूख रही नदियां और लगातार गिर रहे भूजल स्तर की स्थिति में इस डिमांड को पूरा कैसे किया जाएगा। 

शहर में यमुना नदी का जलस्तर न्यूनतम स्तर (480 फुट) पर है, इसमें यदि दो इंच की कमी हुई तो जीवनी मंडी वाटर वर्क्स ठप हो जाएगा। 

उधर शहर में गिरते भूजल स्तर की स्थिति यह है कि 2015 से 2017 के बीच जिले में औसतन करीब एक मीटर तक भूजल स्तर गिरा है। 15 में से सात ब्लाक डार्क जोन घोषित हो चुके हैं। 

हैंडपंप लटक जाते हैं और (टैंक टाइप स्टैंड पोस्ट) टीटीएसपी खराब पड़ी हैं। जलनिगम के आंकड़ों के मुताबिक जिले में करीब 800-900 टीटीएसपी खराब हैं। शहर और जिले में करीब 80 फीसदी हैंडपंप खराब पड़े हैं। 

विधायकों ने करीब 650 नए हैंडपंप लगाने के प्रस्ताव दिए हैं, लेकिन अभी तक एक हैंडपंप नहीं लगा है। इस स्थिति में जनता को पानी कहां से मिलेगा इस और किसी का ध्यान नहीं है। 

कैसे मिलेगा शहर की जनता को पानी

सरकारी आंकड़ों को ही सही मानें तो शहर की प्रतिदिन पानी की डिमांड 350 एमएलडी है। इस डिमांड को पूरा करने के लिए सिकंदरा वाटर वर्क्स की क्षमता 144 एमएलडी की है और जीवनी मंडी वाटर की क्षमता 224 एमएलडी पानी की शोधन की है। 

दोनों वाटर वर्क्स कुल क्षमता 368 एमएलडी पानी शोधित कर सकते हैं, लेकिन वर्तमान में सिकंदरा से 100-120 एमएलडी पानी ही शोधित हो रहा है। 

जीवनी मंडी में गंगाजल प्रोजेक्ट के तहत किए जा रहे जीर्णोद्धार के चलते 45 एमएलडी का प्लांट तो पिछले कई दिनों से बंद चल रहा है। 15-20 एमएलडी पानी शोधन प्रक्रिया के तहत वेस्ट हो जाता है। 15 फीसदी पानी शहर में हो रही लीकेजों में बर्बाद हो जाता है।
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ये बोले मेयर

मेयर नवीन जैन का कहना है कि शहर में पानी की किल्लत किसी से छुपी नहीं है, लेकिन हमारी कोशिश रहेगी कि इस बार जनता को परेशानी का सामना न करना पड़े। 

नदी का जलस्तर बनाए रखने के लिए सिंचाई विभाग के अफसरों के साथ वार्ता कर गोकुल बैराज से डिस्चार्ज बढ़वाने की कोशिश की जाएगी। जून तक गंगाजल आने की उम्मीद है। गंगाजल आ गया तो पेयजल समस्या का स्थायी निदान हो जाएगा।’

जलकल के महाप्रबंधक संजीव रामचंद्र का कहना है कि गर्मियों में पानी की डिमांड बढ़ जाती है। इस वर्ष भी 40 प्रतिशत से अधिक डिमांड बढ़ेगी। यह सही है कि यमुना का जलस्तर न्यूनतम चल रहा है, लेकिन हमारी कोशिश रहेगी गर्मी में लोगों को पर्याप्त पानी मिले। 
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