फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: ग्रेटर आगरा में घर खरीदना नहीं होगा आसान! आसमान छुएंगे जमीनों के रेट, जानें कितनी होगी प्लॉटों की कीमत

Sun, 31 May 2026 10:12 AM IST
Dhirendra Singh देश दीपक तिवारी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

ग्रेटर आगरा प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 67 अरब रुपये तक पहुंचने और इसमें भारी कागजी खर्च जोड़ने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। रखरखाव, मुकदमेबाजी और ब्याज जैसे मदों में बड़ी राशि जोड़ने से जमीन की कीमत 33 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच गई है, जिससे यह योजना आम लोगों की पहुंच से बाहर होती दिख रही है।
विज्ञापन
ग्रेटर आगरा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

शहर से 15 किलोमीटर दूर इनर रिंग रोड एत्मादपुर स्थित रायपुर और रहनकलां में बसाए जा रहे ग्रेटर आगरा में आशियाना बनाना आम लोगों के लिए अधूरा ख्वाब बनकर रह गया है। 67 अरब रुपये के प्रोजेक्ट एस्टीमेट में अप्रत्याशित और मनमाने खर्चों की भरमार है। जहां 2,400 करोड़ रुपये में नाली, सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित होनी हैं, वहीं इनके रखरखाव पर 1,800 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यही नहीं सिर्फ संभावित मुकदमेबाजी के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
विज्ञापन


 

मुख्यमंत्री की नए शहर विस्तारीकरण योजना में इसे बनाया जा रहा है। आगरा विकास प्राधिकरण के इस प्रोजेक्ट के कॉस्ट एस्टीमेट व प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर एडीए बोर्ड के पूर्व सदस्य मदन गर्ग ने सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि जनता को सस्ती और सुलभ आवासीय योजनाएं बनाने के लिए बने एडीए ने इस प्रोजेक्ट में अप्रत्यक्ष खर्चों को जोड़कर जमीन की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। यहां जमीन खरीदना आम लोगों के बस से बाहर है।

 

एस्टीमेट रिपोर्ट के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। किसानों को दिए जाने वाले मूल मुआवजे 620 करोड़ रुपये का लगभग एक-तिहाई हिस्सा यानी 200 करोड़ रुपये सिर्फ मुकदमों के लिए सुरक्षित किया है। इन बेतहाशा कागजी खर्चों का ही नतीजा है कि एस्टीमेट में जमीन की दर 33,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर पहुंच गई है जो मध्यम और निम्न आय वर्ग की जेब पर भारी पड़ रही है।

 

गले नहीं उतर रहे ये खर्च
- जमीन का मुआवजा 620 करोड़ बांटने के बावजूद कोर्ट केस के नाम पर खर्च में 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट जोड़ा गया।
- प्रोजेक्ट में आंतरिक और बाह्य विकास सड़क, सीवर, पानी, बिजली आदि की कुल लागत 2,400 करोड़ रुपये आंकी गई है। लेकिन इनके रखरखाव के लिए 7.5% प्रति वर्ष के हिसाब से 10 साल का खर्च 1800 करोड़ रुपये जोड़ा गया है।
- एस्टीमेट में आकस्मिक खर्चों को दो-दो बार जोड़ा गया है। पहले निर्माण लागत का 3% (72 करोड़ रुपये) और फिर कुल लागत भूमि और विकास कार्य पर फिर से 6% लगभग 308.52 करोड़ रुपये आकस्मिक व्यय जोड़ा गया है। इसके अलावा ओवरहेड एक्सपेंस के नाम पर 10% यानी 514.20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया है।


 

ब्याज का 804 करोड़ रुपये का पहाड़
भूमि अधिग्रहण के खर्च पर 10% की दर से 3 साल का ब्याज 186 करोड़ रुपये और निर्माण अवधि के दौरान 10% की दर से 618 करोड़ रुपये का ब्याज जोड़ा गया है। इन्हीं कागजी खर्चों और ब्याज के चलते जो मूल प्रोजेक्ट काफी कम लागत में तैयार हो सकता था, वह छलांग लगाकर 6,768.72 करोड़ रुपये (67 अरब रुपये से अधिक) पहुंच गया है।

 

कीमत दोगुनी वसूली जाएगी
ग्रेटर आगरा के कुल 449.21 हेक्टेयर (लगभग 44.92 लाख वर्ग मीटर) क्षेत्रफल में से केवल 45.80% यानी 20.57 लाख वर्ग मीटर जमीन ही बिक्री योग्य मानी गई है। पूरे प्रोजेक्ट के 6,768 करोड़ रुपये के भारी खर्च को जब इस बिक्री योग्य जमीन पर बांटा गया, इसके आधार पर एडीए ने 33,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर जमीन की तय की है।

 
विज्ञापन

मुआवजे के बाद भी होते हैं वाद
आगरा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एम अरुन्मोली ने बताया कि भूमि का मुआवजा मिलने के बाद भी कुछ किसान भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण में चले जाते हैं। इस वजह से कोर्ट केस के लिए 200 करोड़ रुपये का ग्रेटर आगरा प्रोजेक्ट में प्रावधान किया है। 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें