आगरा। इनर रिंग रोड स्थित रहनकलां व रायपुर की जिस भूमि पर ग्रेटर आगरा बसाने की तैयारी हैं, वहां किसानों को 365 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटा जा चुका है। शेष बचे 117 करोड़ रुपये मुआवजे के वितरण पर रार शुरू हो गई है। सड़क किनारे की भूमि के लिए बढ़ी दरों से मुआवजा मांग रहे किसान हाईकोर्ट पहुंच गए। मुआवजे के चक्कर में एडीए को पूरी जमीन पर कब्जा नहीं मिल पा रहा है।
रहनकलां व रायपुर की 442 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण आगरा विकास प्राधिकरण ने 2010-11 में किया था। किसानों को 15 साल बाद 482 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया जाना था जिसमें से 365 करोड़ रुपये एडीए बांट चुका है। सड़क किनारे की भूमि के लिए करीब 100 करोड़ रुपया बंटना शेष हैं। वहीं जिन किसानों की भूमि सड़क किनारे है, वह ज्यादा मुआवजे की मांग करते हुए हाईकोर्ट चले गए। इसके अलावा करीब 17 करोड़ रुपये की भूमि विवादित है। मुआवजा वितरित नहीं होने के कारण एडीए को पूरी जमीन पर कब्जा नहीं मिल पा रहा है।
अब तक करीब 60 हेक्टेयर भूमि पर ही एडीए कब्जा ले सका है। बाकी जमीन पर कब्जा लेने के दौरान प्रभावित किसान व महिलाएं विरोध कर रही हैं। ऐसे में एडीए और प्रशासन फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। एडीए उपाध्यक्ष एम अरुन्मोली ने बताया कि कब्जा दिलाने के लिए प्रशासन को पत्र भेजा है। रहनकलां व रायपुर में ग्रेटर आगरा योजना प्रस्तावित है। वहां 10 आवासीय टाउनशिप बनेंगी। 4500 से अधिक भूखंड होंगे। ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट भी प्रस्तावित हैं। कार्य योजना, डिजाइन व अन्य औपचारिकताएं पूर्ण की जा रही हैं।