नहरों की सिल्ट सफाई की आड़ में तीन करोड़ रुपये से सिंचाई विभाग में घास छिलाई का खेल हो रहा है। इस फर्जीवाड़े को नहीं रोका तो 50 हजार से अधिक किसान सिंचाई से वंचित रह जाएंगे। यह गुहार सोमवार को किसानों ने जिलाधिकारी अरविंद बंगारी से कलेक्ट्रेट में लगाई।
ज्ञापन देने पहुंचे किसानों ने डीएम से कहा कि नहरों की सफाई के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है। एक बार नहरों में पानी छोड़ दिया तो सफाई में हुए भ्रष्टाचार की जांच भी नहीं हो पाएगी। पानी छोड़ने के बाद यह बताना मुश्किल होगा कि सिल्ट निकाली गई या नहीं। जिले में 700 किमी. में नहरों का जाल फैला है। छोटी-बड़ी करीब 70 से अधिक नहर हैं।
रबी फसलों में नहरों की सफाई के लिए करीब तीन करोड़ रुपये लोअर खंड सिंचाई को मिले हैं। भारतीय किसान संघ के पूर्व प्रदेश मंत्री मोहन सिंह चाहर ने कहा कि आगरा टर्मिनल में तीन फुट सिल्ट जमा है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकली इस सिल्ट से नहरों से दुर्गंध आ रही है। बड़ी नहर फतेहपुर सीकरी में सिर्फ पटरी के गड्ढे भरे गए। किनारों से घास ही छीली गई है।
जिला किसान सलाहकार समिति पूर्व सदस्य वीरेंद्र परिहार ने बताया कि नहरों की सफाई अक्तूबर में शुरू होनी चाहिए थी जो दिवाली तक खत्म हो जाती। लेकिन, सरकारी धन का बंदरबांट करने के लिए अधिशासी अभियंता ने जानबूझकर सफाई देर से शुरू कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि बुआई कर चुके किसान सिंचाई के लिए पानी मांगेंगे। नहरों में पानी छोड़ने के बाद सफाई में हो रहे भ्रष्टाचार के दाग भी धुल जाएंगे। वहीं, इस संबंध में डीएम अरविंद बंगारी ने बताया कि नहर सफाई की जांच के लिए कमेटी बनाई जा रही है। अधिशासी अभियंता पर अनियमितताओं के आरोप सिद्ध हुए तो उनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए शासन को लिखा जाएगा।