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यूनिवर्सिटी के फर्जीवाड़े की जांच कराएंगे राज्यपाल

Sat, 09 Jul 2016 12:07 AM IST
अमर उजाला आगरा
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रामनाइक - फोटो : अमर उजाला ब्‍यूूराो
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प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने डा. बीआरए यूनिवर्सिटी में चल रहे तमाम तरह के फर्जीवाड़े की जांच कराने का फैसला लिया है। उन्होंने बताया कि यह कदम उनके पास आ रही शिकायतों पर उठाया है। छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले बेकनाब किए जाएंगे। जांच में फर्जीवाड़े की तमाम पर्तें भी खुल जाएंगी। उन्होंने बताया कि उनके पास 10वीं और 12वीं के शिक्षकों से स्नातक और स्नातकोत्तर की कापियों का मूल्यांकन कराने की भी शिकायतें आई हैं। यह बेहद गंभीर है। वह शुक्रवार को विश्वविद्यालय के छलेसर कैंपस में पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्राम्य विकास संस्थान के नए भवन का शिलान्यास करने आए थे।
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उन्होंने पत्रकारों से कहा कि उनके पास भी छात्रों को मार्कशीट और डिग्री न मिलने और आनलाइन मार्कशीट के अंकों में गड़बड़ी की तमाम शिकायतें आई हैं। इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट की फर्जी डिग्री के प्रकरण भी शामिल हैं। इसके अलावा मार्कशीट और डिग्री के आवेदन कचरे के डब्बे में फेंक दिए जाने की शिकायतें हैं। वह इसकी जांच करा रहे हैं।
बता दें कि अमर उजाला ने विवि के तमाम फर्जीवाड़ों का खुलासा किया है। राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय स्तर पर कुलपति ने क्या कार्रवाई की, इन सभी की रिपोर्ट मांगी जाएगी। साथ ही वह भी इस मामले में जांच कराएंगे। राज्यपाल ने कहा कि उनके पास 40-50 हजार छात्रों को अब तक डिग्री न मिलने की शिकायत है।
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उन्हें जब बताया कि वर्ष 2013-14 व 2014-15 के दीक्षांत समारोह में शामिल छात्र-छात्राओं को अब तक मार्कशीट नहीं मिली तो वह हैरान रह गए। विवि प्रशासन द्वारा 10वीं और 12वीं के छात्रों से स्नातक और परास्नातक परीक्षाओं की कापियां जंचवाने के सवाल पर कहा, मामले की जांच करवाकर इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी।
उन्होंने रिजल्ट में देरी पर भी चिंता जताई। बोले, प्रदेशभर के 26 विश्वविद्यालयों में से सिर्फ डा. बीआरए विवि ही रिजल्ट निकालने में पिछड़ा है। कुलपति से अभी तक निकाले गए रिजल्ट और पेंडेंसी के बारे में आख्या मांगी है।
बता दें किविवि 30 जून तक सिर्फ 950 छात्रों वाले कोर्स बीकाम वॉकेशनल का ही परिणाम जारी कर सका है, जबकि 6.54 लाख विद्यार्थी इसमें अध्ययनरत हैं।
वहीं, कार्यक्रम के दौरान ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय एवं 21वीं शताब्दी’ विषय पर गोष्ठी में सांसद डा. मुरली मनोहर जोशी ने यूपी और बिहार की शिक्षा प्रणाली को विचारणीय बताया। उन्होंने बिहार में हाईस्कूल के टॉपर और परीक्षक की स्थिति का उदाहरण दिया कि किस तरह अपने विषय तक का नाम न बता पाने वाली छात्रा को टॉपर बना दिया गया था।
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