परिवहन आयुक्त बीएन सिंह ने रविवार को ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक और संभागीय परिवहन विभाग कार्यालय का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारी जिस राज को छुपाना चाहते थे, उसे आयुक्त ने अपनी बातों में उजागर कर दिया। भारी वाहनों के रजिस्ट्रेशन कक्ष में आयुक्त ने एक अधिकारी से कंप्यूटर पर डाटा दिखाने के लिए कहा। वह कंप्यूटर नहीं खोल सके। इस पर आयुक्त बोले, सारा राज यहीं छुपा है। बताया गया कि उनके इस वाक्य का इशारा कंप्यूटर पर प्राइवेट युवकों के काम करने की ओर था। इस बारे में शिकायतें होती रही हैं। उन्होंने लैपटॉप उपलब्ध होने पर भी अधिकारियों के उस पर काम नहीं करने का हवाला भी दिया।
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दोपहर करीब 11:30 बजे परिवहन आयुक्त आरटीओ कार्यालय पहुंचे। यहां पर पुरानी बिल्डिंग से निरीक्षण शुरू किया। बरामदे में बड़े बकायेदारों के बोर्ड लगे मिले। एआरटीओ कक्ष के बाद लेखा और भारी वाहन रजिस्ट्रेशन कक्ष में पहुंचे। यहां पर एक अधिकारी से पूछा कि वाहनों का भार कितना कम हो रहा है, इसका डाटा कंप्यूटर में दिखाओ। यह सुनकर अधिकारी और कर्मचारी सुन्न से पड़ गए, तब किसी ने डीवीए (डाटा एंट्री ऑपरेटर) को बुलाने के लिए कहा। तब परिवहन आयुक्त बोले कि सारा राज यह ही है। लैपटॉप देने के बाद भी उस पर काम नहीं किया जाता है।
इसके बाद नई बिल्डिंग कक्ष में गए। यहां आरटीओ और एआरटीओ के नाम व मोबाइल नंबर वाला बोर्ड लगा था। बोर्ड के आगे अलमारी रखी थी। इस पर आयुक्त बोले कि किसी का नंबर तो नजर नहीं आ रहा। बिल्डिंग में सुधार के साथ लोगों से संवेदनशीलता से प्रस्तुत आने का निर्देश दिया।
वेतन न मिलने की शिकायत पर सीधे किया फोन
आरटीओ में स्मार्ट चिप कंपनी के कर्मचारी भी कार्य करते हैं। परिवहन आयुक्त ने इन कर्मचारियों से भी मुलाकात की। कर्मचारियों ने बताया कि पिछले 4 माह से वेतन नहीं मिल रहा। इस पर आयुक्त ने सीधे कंपनी के अधिकारी मनीष से बात की। उनको वेतन जारी करने का निर्देश दिया।
15 दिन के बाद करेंगे समीक्षा
परिवहन आयुक्त ने आरटीओ अरुण कुमार और एआरटीओ (प्रशासन) एनसी शर्मा को निरीक्षण के दौरान सुधार के निर्देश दिए हैं। इन सभी बिंदुओं पर 15 दिन के बाद ऑनलाइन समीक्षा बैठक करने के लिए कहा। तब तक सुधार के कार्य शुरू हो जाने चाहिए।
रविवार होने के कारण नहीं थे आम लोग
परिवहन आयुक्त का निरीक्षण रविवार वाले दिन कराया गया। इस दिन कार्यालय बंद होने की लोगों को जानकारी होती है। इस वजह से कार्यालय में सिर्फ आरटीओ का स्टाफ मौजूद रहा। अन्य दिनों में बाहरी लोगों की भीड़ के साथ सेवानिवृत्त कर्मचारी भी उपस्थित रहते हैं। आम लोगों के होने पर परिवहन आयुक्त उनसे रूबरू होते। आम लोगों के समस्या सीधे बताने पर अधिकारियों के लिए परेशानी खड़ी हो सकती थी।