बाह: पथवारी माता मंदिर बाह पर भागवत कथा
बाह। पथवारी माता मंदिर बाह पर मंगलवार को भागवत कथा का प्रवचन करते हुए बाल विदुषी राधा शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला का विस्तार से वर्णन किया। शास्त्री ने बताया कि ब्रजवासी प्रतिवर्ष देवराज इंद्र की पूजा करते थे। भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि उनकी आजीविका का आधार गोवर्धन पर्वत, गौ माता और प्रकृति हैं। इसलिए प्रकृति का सम्मान और गोवर्धन की पूजा करनी चाहिए।
भगवान श्रीकृष्ण की प्रेरणा से ब्रजवासियों ने इंद्र यज्ञ के स्थान पर गोवर्धन पूजा की। इससे क्रोधित होकर देवराज इंद्र ने मूसलाधार वर्षा कर ब्रज को जलमग्न करने का प्रयास किया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी ब्रजवासियों, गौवंश और जीव-जंतुओं को सुरक्षित आश्रय प्रदान किया। सात दिन तक निरंतर पर्वत धारण कर भगवान ने यह संदेश दिया कि सच्चे भक्तों की रक्षा स्वयं ईश्वर करते हैं और अहंकार का अंत निश्चित है। उन्होंने कहा कि गोवर्धन पूजा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, गौ-सेवा, पर्यावरण के प्रति सम्मान और सामूहिक एकता का भी प्रतीक है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने जीवन में सेवा, सद्भाव, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। कथा स्थल पर भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया, जहां श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाते हुए भक्ति रस में सराबोर दिखाई दिए। परीक्षित महंत रामदास महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह कथा केवल एक पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि इसमें गहरे आध्यात्मिक, नैतिक और पर्यावरणीय संदेश निहित हैं।