बेटी की हर सफलता पर पापा ने कहा शाबाश। बस फिर क्या था बिटिया ने भी परचम लहरा दिया। यूनिवर्सिटी में गोल्ड मेडल हासिल किया तो दीक्षांत समारोह में देश के राष्ट्रपति ने सम्मानित किया। जूडो में अपनी प्रतिभा से सभी को चौंका दिया।
राया के गांव आयराखेड़ा निवासी सत्यदेव शर्मा की पुत्री कामनी शर्मा बचपन से ही पढ़ने में तेज थी। गांव के माहौल में बेटी की उच्च शिक्षा को लेकर सवाल उठते है। मां हरेंद्री ने इन सब बातों को दरकिनार कर बेटी का हौसला बढ़ाया। मम्मी-पापा ने हिम्मत बढ़ाई तो मानो बिटिया के सपनों को पंख लग गए।
हाईस्कूल और इंटर में अच्छे अंक पाकर नाम रोशन किया। कामनी ने जूडो कराटे में भी ग्रीन बेल्ट हासिल कर ये धारणा तोड़ दी कि गांव की बेटी खेलकूद में आगे नहीं बढ़ सकती।