मैनपुरी। दन्नाहार क्षेत्र के नौनेर निवासी सत्यपति मिश्रा सेवानिवृत्त होने के बाद भी बच्चों को गुरुकुल की शिक्षा दे रहे हैं। संस्कृत के साथ गुरुकुल की मर्यादा सिखाने वाले संदेश भी देते हैं। समय से बच्चों को बुलाकर शिक्षा देना उनकी दिनचर्या में शामिल है।
श्री सांगवेद संस्कृत माध्यमिक विद्यालय (गुरुकुल नौनेर) की स्थापना वर्षं 1942 में हुई थी। पंडित शंकरदेव आचार्य और भाई वाचस्पति मिश्रा ने जब स्कूल का संचालन शुरू किया तो 20 बच्चे शिक्षा लेने पहुंचे। वर्ष 1966 में संपूर्णानंद विश्वविद्यालय बनारस से बिना अनुदान के शास्त्री समकक्ष बीए, आचार्य समकक्ष एमए की मान्यता मिली। उस समय गुरुकुल में 100 बच्चे पढ़ते थे। वर्ष 1990 में सत्यपति मिश्रा का वेतन पर अनुमोदन हो गया और वर्ष 2000 में यूपी संस्कृत बोर्ड बना। वर्ष 2009 में सत्यपति मिश्रा सेवानिवृत्त हो गए वहीं वर्ष 2012 से गुरुकुल का संचालन बंद हो गया। विद्यालय भी खंडहर में बदल चुका है।
घर पर देने लगे शिक्षा
सत्यपति मिश्रा घर पर ही बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने लगे। शुरूआत में घर पर क्षेत्र के 35 से 40 बच्चे आते थे। अब बच्चों की संख्या घटकर 10 से 15 रह गई है। कारण बच्चों के साथ ही लोगों का गुरुकुल शिक्षा के प्रति रुझान कम हो रहा है।
गरीब बच्चों की करते मदद
सत्यपति मिश्रा अनुशासन प्रिय हैं। शिक्षा पाने वाले बच्चों के लिए समय से आना जरूरी है। देरी से आने पर बच्चों को वह उस दिन नहीं पढ़ाते हैं। गरीब बच्चों को कापी, किताबें खरीदने के लिए आर्थिक मदद करते हैं।