किशनी से लापता हुईं तीन छात्राएं पुलिस को मिल गईं हैं। पुलिस को उन्होंने जो कहानी सुनाई उसके मुताबिक तीनों फिल्म अभिनेत्री बनने के लिए मुंबई जाने के लिए घर से निकलीं थीं। गुरुवार की सुबह तीनों घर वापस आ गईं। पुलिस ने आवश्यक लिखापढ़ी करने के बाद तीनों को माता पिता की सुपुदर्गी में दे दिया है।
थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी दो चचेरी बहनें कुसमरा क्षेत्र के एक विद्यालय में कक्षा आठ की छात्राएं थीं। उसी विद्यालय में चौकी क्षेत्र निवासी एक अन्य छात्रा भी पढ़ती थी। बुधवार को तीनों ही छात्राएं घर से स्कूल जाने के लिए निकलीं थीं।
छुट्टी के बाद भी जब तीनों घर नहीं लौटीं तो एक छात्रा के परिजनों ने चचेरी बहनों पर पुत्री को बहला फुसला कर ले जाने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। तीनों ही लड़कियों की उम्र 13-14 वर्ष के आसपास थी।
पुलिस उनकी तलाश में जुट गई थी। कई संदिग्ध लोगों को उठाया गया। इस बीच बृहस्पतिवार की सुबह तीनों छात्राएं घर वापस लौट आईं। बताया कि वह मुंबई अभिनेत्री बनने जा रहीं थीं।
इसीलिए तीनों एक साथ घर से चली गईं थीं। ग्वालियर पहुंचने के बाद वह वापस लौट आईं। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करने के बाद तीनों को परिवारीजनों के सुपुर्द कर दिया।
दो माह पहले ही शुरू हो गई थी तैयारी
ग्वालियर से वापस लौट कर आईं तीनों किशोरियों ने बताया कि उनकी चाहत मुंबई जाकर फिल्मों में काम करना था। इसके लिए गांव का ही एक युवक व इटावा जिले के चौबिया थाना क्षेत्र के गांव महाराजपुर निवासी सचिन से संपर्क में थीं।
किसी को उनके घर छोड़ने का शक हो न इसलिए एक छात्रा ने अपने कपड़े बैग में रखकर दो माह पूर्व ही साथ जाने वाली छात्रा को दे दिए थे। कुसमरा से रोडवेज बस पकड़कर इटावा पहुंचीं।
वहां से देर रात तक ग्वालियर पहुंच गईं थीं। उनके साथ ग्वालियर में सचिन भी मौजूद था। किशोरियों के लापता होने की सूचना पर पुलिस ने जब दबाव डाला तब सुबह तक वह लोग वापस घर वापस आ गए।
गलत हाथों में पड़ सकतीं थीं
इंस्पेक्टर ओमहरि वाजपेई ने मामला दर्ज कर कई संदिग्धों को पूछताछ के लिए उठा लिया। इंस्पेक्टर ने बताया कि मुंबई में अगर बच्चियां गलत हाथों में पहुंच जाती तो कुछ भी हो सकता था। तीनों का मेडिकल कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है।